इस्लामिक क्रान्ति का आगाज़ होने वाला है क्योंकि दुनिया के सारे मुस्लिम देश एकजुट हो रहे है
क्योंकि हाल ही में इरान जो कि शिया बहुल मुल्क है उसने तुर्की और पकिस्तान के साथ मिलकर म्यांमार मसले पर अपनी सेना बर्मा में भेजने की चेतावनी दी थी और अभी भी तुर्की और पकिस्तान के साथ इस मसले पर सहयोग कर रहा है.
अब वो दिन दूर नहीं जब सभी मुस्लिम देश एक स्टेज पर होंगे और उसमे शिया और सुन्नी दोनों देश आयेंगे.इससे दुनिया भर में इस्लामिक गुट मजबूत होगा और दुनिया के किसी मसले को हल करने में उनकी अहम् भूमिका होगी और उनको UN जैसे संघठन से किसी अहम मुद्दे पर फैसले लेने के लिए परमिशन लेने की जरुरत नहीं पड़ेगी
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दुनिया में इस्लामिक क्रान्ति का आगाज़ होने वाला है और इसका मकसद दुनिया भर के मुसलमानों की रक्षा और उनके खिलाफ ज़ुल्म को रोकना रहेगा. दुनियाभर में अबतक लाखो मुसलमानों को मारा जा चूका है और अभी भी किसी ना किसी देश में मुसलमानों के खिलाफ हिंसा और नफरत देखने को मिल जाती है.इसका ताजा उदाहरण बर्मा है जहां अबतक हजारो मुसलमानों को मारा जा चूका है और 3 लाख से ज्यादा मुसलमान बर्मा से निकाले जा चूके है.इसपर दुनिया भर के मानवतावादी संघठन खामोस है.
अब दुनयाभर के मुस्लिम देशो को ये समझ में आ गया है कि ये पुरी दुनिया मुसलमानों पर हो रहे ज़ुल्म के खिलाफ आवाज़ नहीं उठाएगी.इसके लिए 50 से ज्यादा मुस्लिम देश मिलकर ये तय कर चुके है उनको एक होना पड़ेगा.अगर अब भी वो एक ना हुए तो दुनिया उनके ऊपर ज़ुल्म करती रहेगी.
इससे ये साफ़ जाहिर हो गया है कि दुनिया में इस्लामिक क्रांति का आगाज़ होने वाला है.अब दुनियाभर के सभी इस्लामिक मुल्क एकजूट होने में लग गए है.
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दुनिया में इस्लामिक क्रान्ति का आगाज़ होने वाला है और इसका मकसद दुनिया भर के मुसलमानों की रक्षा और उनके खिलाफ ज़ुल्म को रोकना रहेगा. दुनियाभर में अबतक लाखो मुसलमानों को मारा जा चूका है और अभी भी किसी ना किसी देश में मुसलमानों के खिलाफ हिंसा और नफरत देखने को मिल जाती है.इसका ताजा उदाहरण बर्मा है जहां अबतक हजारो मुसलमानों को मारा जा चूका है और 3 लाख से ज्यादा मुसलमान बर्मा से निकाले जा चूके है.इसपर दुनिया भर के मानवतावादी संघठन खामोस है.
अब दुनयाभर के मुस्लिम देशो को ये समझ में आ गया है कि ये पुरी दुनिया मुसलमानों पर हो रहे ज़ुल्म के खिलाफ आवाज़ नहीं उठाएगी.इसके लिए 50 से ज्यादा मुस्लिम देश मिलकर ये तय कर चुके है उनको एक होना पड़ेगा.अगर अब भी वो एक ना हुए तो दुनिया उनके ऊपर ज़ुल्म करती रहेगी.
इससे ये साफ़ जाहिर हो गया है कि दुनिया में इस्लामिक क्रांति का आगाज़ होने वाला है.अब दुनियाभर के सभी इस्लामिक मुल्क एकजूट होने में लग गए है.
