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रोते हुए मां बोली, 11 साल तक मेरे बेटे के साथ आतंकी जैसा सलूक इसलिए क्योंकि वो मुसलमान था?


नई दिल्ली। राजधानी को 12 साल पहले दहला देने वाले सीरियल ब्‍लास्‍ट केस मामले में बरी हुए मुहम्मद रफीक के साथ जो हुआ। उसकी तो जिंदगी का इतिहास ही बदल गया। उसने कभी नहीं सोचा था कि उसके साथ ऐसा होगा।


जानकारी के अनुसार मुहम्मद रफीक को जिस समय जेल में डाला गया। उस समय वह 22 साल का था और एमए के फाइनल ईयर की पढ़ाई कर रहा था। वह पीएचडी की तैयारी करना चाहता था ।
उसकी मां ने बताया जिस समय दिल्ली में ब्लास्ट हुआ तो वह अपनी क्लास में पढ़ाई कर रहा था। इस बलास्ट में उसका नाम आएगा उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था। जिस समय कोर्ट उनके बेटे को बरी किया तो उनके आंखों में आसूं आ गए। उनका कहना है कि उन्हें ऐसे जैसे उन्होंने अपने बेटे को दोबारा जन्म दिया है।

वहीं मोहम्मद रफ़ी शाह के पिता का कहना है कि उन्हें अपने बेटे पर पूरा भरोसा था। वह उसे हमेशा अच्छी किताबें खरीकर लाते थे और उसे पढ़ने के लिए देते थे। वह हमेशा अपनी कक्षा में प्रथम आता था। लेकिन उन्हें नहीं पता था कि 21 नवंबर 2005 को उनके बेटे की जिंदगी बदल देगा। लगातार वह अपने बेटे को निर्दोश साबित करने के लिए गुहार लगाते रहे। मगर कोई नहीं माना। कोर्ट का फैसला 12 साल बाद आया। इससे उनके बेटे की तो जिंदगी पूरी तरह बदल गई है। वह तो पढ़ना चाहता था। मगर उसका तो सपना ही टूट गया।

क्या है मामला :
बता दें कि इससे पहले कोर्ट ने 2008 में मामले के आरोपी मास्टरमाइंड डार और दो अन्य आरोपियों पर देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने, साजिश रचने, हथियार जुटाने, हत्या और हत्या के प्रयास के आरोप तय किए थे। दिल्ली पुलिस ने डार के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल किया था। इस चार्जशीट में उसके कॉल डिटेल्‍स का जिक्र भी किया गया, जिससे कथित तौर यह बात सामने आई कि वह लश्कर-ए-तैयबा के अपने आकाओं से कनेक्‍शन में था। इस मामले में पुलिस ने अक्टूबर 2005 में धमाकों के सिलसिले में तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज की थीं।

एक दशक पहले दीपावली के जश्‍न में डूबी दिल्‍ली अचानक हुए इन आतंकी हमलों से दहला गई थी। पहला धमाका-शाम 5:38 बजे पहाड़गंज में हुआ, जिसमें 9 लोगों की मौत हुई और, 60 घायल हुए, दूसरा धमाका शाम 6:00 बजे गोविंदपुरी में हुआ, जिसमें 4 लोग घायल हुए, जबकि तीसरा धमाका सरोजनी नगर में शाम 6:05 बजे हुआ जिसमें सबसे ज्‍यादा 50 लोगों की मौत हुई और 127 लोग घायल हुए।

हाल ही में सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद उन्‍होंने फैसला सुरक्षित रख लिया था। आरोपी यदि दोषी साबित होते हैं, तो फांसी की सज़ा तक हो सकती है। मामले को पहले ही 10 साल से ऊपर हो चुके हैं।
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