Header Ads

ईद मिलादुन्नबी की छुट्टी की समाप्ति पर मुस्लिम संगठनों ने खोला योगी सरकार के खिलाफ मोर्चा




ईद मिलादुन्नबी की छुट्टी को रद्द करने को लेकर मुस्लिम संगठनों ने योगी सरकार के खिलाफ मौर्चा खोल दिया है. ईद मिलादुन्नबी की छुट्टी को रद्द करने को लेकर मुस्लिम नेताओं ने इसे मुस्लिमों के खिलाफ एक साजिश करार दिया. साथ ही इस फैसले को मुस्लिमों को बाटने वाला बताया. साथ ही सवाल उठाया कि सरकार ने हजरत अली की जयंती पर छुट्टी को बहाल क्यों रखा है.

शिया शहरकाजी मौलाना अली अब्बास खां नजफी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने पैगंबर-ए-इस्लाम की जयंती के दिन छुट्टी रद करके आस्था को चोट पहुंचाई है. अगर हजरत अली की जयंती पर छुट्टी बहाल है तो नबी पाक की यौम-ए-पैदाइश पर छुट्टी को रद नहीं करना चाहिए था.

वहीं शिया शहरकाजी डॉ. हिना जहीर नकवी ने कहा कि सरकार के इस फैसले की कड़ी निंदा की जाएगी. सरकार ने महापुरुषों के नाम पर छुट्टियां रद की हैं लेकिन हुजूर पाक इस्लाम के पैगंबरों के सरदार हैं. ईद मिलादुन्नबी का त्योहार रामनवमी, शिवरात्रि, क्रिसमस जैसा है. इसलिए इस दिन की छुट्टी को फौरन पहले की तरह बहाल किया जाए.

बरेलवी शहरकाजी मौलाना आलम रजा नूरी ने कहा कि जाहिर तौर पर यह फैसला मुसलमानों को बांटने वाला है. पैगंबर-ए-इस्लाम दुनिया में हर फिरके के मुसलमानों के पैगंबर हैं. हजरत अली उनके दामाद और इस्लाम के चौथे खलीफा हैं. ऐसे में पैगंबर-ए-इस्लाम की जयंती पर छुट्टी रद करना और हजरत अली की जयंती पर छुट्टी बहाल रखने का सरकार ने यह घिनौनी राजनीति का संदेश दिया है.

वहीँ ऑल इंडिया उलेमा मशाइख बोर्ड के संस्थापक व राष्ट्रीय अध्यक्ष सैय्यद मोहम्मद अशरफ़ किछौछवी ने कहा कि हम भी मानते हैं कि छुट्टियों से काम प्रभावित होता है, लिहाज़ा इन्हें कम किया जाना चाहिए, लेकिन ईद मिलादुन्नबी की छुट्टी ख़त्म करना सही फैसला नहीं है. क्योंकि यह त्यौहार शांति का त्यौहार है. शांति पर्व के तौर पर मनाया जाता है.


हमारा Facebook पेज Like करने के लिए यहाँ क्लिक करें
Powered by Blogger.