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गुजरात दंगा, बिलकीस को मिला इंसाफ- 11 दोषियों को उम्रकैद की सज़ा बरकरार और बॉम्बे हाईकोर्ट ने 3 दोषियों को फांसी देने की सीबीआई याचिका भी खारिज की



मुंबई – बिलक़ीस उस वक़्त गर्भवती थीं।  उनके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया. उन्हीं के शब्दों में, “जब मुझे होश आया, तब मेरे शरीर पर सिर्फ़ पेटीकोट था। मेरा दुपट्टा, ब्लाउज़ सब फट चुका था। आसपास देखा, तो उन सबकी लाशें दिखाई दीं, जिनके साथ मैं घर से जान बचाने के लिए निकली थी। मैंने मेरी छोटी बेटी सालेहा को भी वहीं देखा। वह मेरी जान थी, लेकिन तब उसमें जान नहीं बची थी।  बड़ी मुश्किल से मैं पास वाले टीले पर चढ़ गई। वहां किसी जानवर की छोटी सी गुफ़ा थी, चौबीस घंटे मैंने वहां काटे।”


फैसला जो आया है
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बिलकिस बानो मामले में 11 दोषियों की उम्रकैद की सज़ा बरकरार रखी है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने 3 दोषियों को फांसी देने की सीबीआई याचिका भी खारिज कर दी है। दरअसल, बॉम्बे हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला बरकरार रखा है। जिन आरोपियों को ट्रायल कोर्ट ने दोषी माना उन्हें हाईकोर्ट ने भी दोषी माना है। इतना ही नहीं कोर्ट ने 7 लोगों को बरी किए जाने के फैसले को भी पलट दिया है। इनमें डॉक्टर और पुलिसवाले शामिल हैं। इनपर सबूतों से छेड़छाड़ का आरोप है।
सबूतो के साथ छेड़छाड़
अदालत ने सबूतों के साथ छेड़छाड़ और गलत सूबत पेश करने के आरोप में 2 डॉक्टरों और 5 पुलिसवालों को दोषी करार दिया गया। इन्हें सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था। सभी को 20 हजार जुर्माना देना होगा। ये दोषी ट्रायल के दौरान ही सजा काट चुके हैं, इसलिये उन्हें जेल नहीं जाना होगा।

14 लोगों की हत्या और बिलकीस
आपको बता दें कि 2002 में गुजरात दंगों के दौरान 19 साल की बिलकिस का बलात्कार किया गया। उस वक्त वह 5 महीने की गर्भवती थीं। अपराधियों ने बिलकिस के परिवार के 14 लोगों की हत्या की। दंगों के दौरान बिलकिस नीमखेड़ा में रहती थी। वह हालात खराब होने के बाद परिजनों के साथ वहां से जा रही थी, जब दंगाइयों ने उन्हें पकड़ लिया।
जब मुझे होश आया
बिलकिस के आरोपों के मुताबिक- वे सबको मार रहे थे, मुझे भी मारा और कुछ देर बाद मैं बेहोश हो गई। जब मैं होश में आई तो निर्वस्त्र थी। बच्ची की लाश पास ही रखी थी और जितने लोग थे वे मिल नहीं रहे थे। दंगाइयों ने उन्हें भी शायद इसलिए छोड़ दिया कि वह मर गई हैं। जब वह पुलिस के पास गईं तो उन्हें कोई मदद नहीं मिली।
पुलिस वाले भी डराते थे बिलकीस को पुलिसवालों ने उन्हें यह कहकर डराया कि हम डॉक्टर के पास ले जाएंगे वह तुमको जहर की सूईं दे देगा। वहीं दो डॉक्टरों ने भी कोई मदद नहीं की और गलत रिपोर्ट भी दी। इसके बाद बिलकिस ने सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी। कोर्ट ने यह मामला सीबीआई को सौंपा था और इसका ट्रायल भी गुजरात के बाहर कर दिया था। इस लड़ाई के दौरान उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। अलग-अलग रिश्तेदारों के यहां उन्हें मदद लेनी पड़ी, क्योंकि उनकी जान को खतरा हो सकता था।
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