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मशहूर शायर इमरान प्रतापगढ़ी पर धमाकेदार हमला हुआ; पढ़िए पूरा मामला… शेयर करें…



मशहूर शायर इमरान प्रतापगढ़ी पर एक और शायर फहीम राजपूत ने हमला बोलै है! फहीम राजपूत ने इमरान प्रतापगढ़ी की सस्ती लोकप्रियता हासिल करने वाला व्यक्ति बताया है! फहीम राजपुर ने अपने फेसबुक पोस्ट में इमरान प्रतापगढ़ी को खरी खरी सुनायीं हैं!

पढ़िए क्या लिखा फहीम राजपूत ने…

क़ौम के जज़्बात से खेलने वाला इमरान प्रतापगढ़ी कहता है कि वह पहलू खाँ की अस्सी बरस की माँ का पूरी ज़िंदगी खर्च उठाएगा! यह बात अपने आप में बेहद शर्मनाक है! उम्र के आखरी पड़ाव में जिस औरत ने अपने सामने अपने बेटे को खोया हो उसे पैसों की ज़रूरत नहीं, उसे किसी के द्वारा अपना खर्च उठाने की ज़रूरत नहीं क्योंकि मरहूम पहलू खाँ और उनका परिवार सड़क पर भीख नहीं मांग रहा था बल्कि बाहैसियत होते हुए दूध का व्यापार किया करता था और आज भी कर रहा है! 

यह किसी भी ज़मीर पसंद शख्स के लिए शर्म की बात होगी कि मदद के नाम पर चिल्ला चिल्ला कर पूरी दुनिया के सामने इस बात का ढिंढोरा पीटा जाए और कहा जाए कि मैं, इमरान प्रतापगढ़ी एक अस्सी साल की बुजुर्ग का सारा खर्च उठाऊंगा! 

आखिर दो रोटी और प्याली भर दूध पर पूरा दिन बिता देनी वाली पहलू खाँ की माँ की ज़रूरतें ही कितनी हैं? क्या उनको ऑडी और बीएमडब्ल्यू में घूमना है? क्या मरहूम पहलू खाँ की माँ को यूरोप घूमना है? नहीं! वह तो मेवात के एक छोटे से गाँव में चारपाई पर लेटे हुए आँसुओं में डूब कर भारत की उस न्यायव्यवस्था से नाराज़ हैं जिसने उनके उनका बेटा छीन लिया! 


वह बूढ़ी माँ जो कि मेरी भी माँ है, उसे किसी से पैसा की ज़रूरत नहीं बल्कि अपने बेटे के हत्यारों को जेल भेजना की ज़रूरत है! वह धूप और गर्मी में जयपुर विधानसभा के सामने धरने पर इसलिए नहीं बैठी की क़ौम के नाम पर नेताओं की दलाली करने वाला इमरान प्रतापगढ़ी उनके नाम से अपने आपको चमका ले! वह बूढ़ी माँ अपने बेटे के हत्यारों और पोतों को मार कर घायल कर देने वाले गौ गुंडों को जेल भेजने की लड़ाई लड़ रही है, उस माँ को कानूनी मदद की ज़रूरत है, कुछ नोटों के बंडलों की नहीं जो कि पूरी दुनिया में बता बता कर दिया जाए!

जब से पहलू खाँ की हत्या हुई है उसके बाद से इस बूढ़ी माँ से मिलने आने वालों की लाइन लगी है, कोई एक लाख दे गया तो कोई तीन लाख, किसी ने कानूनी मदद का वादा किया तो कोई राजस्थान विधानसभा के सामने बूढ़ी माँ के साथ धरने पर बैठा! लेकिन किसी ने इस तरह से उस बूढ़ी माँ के दर्द को नहीं बेचा जैसा गवैय्या इमरान प्रतापगढ़ी बेच रहा है! जैसी रूसवाई इमरान ने की वैसी तो कोई भी नहीं करता!

एक माँ आज चीख चीख कर कह रही है कि उसका खर्च ज़िंदगी भर उठाने का ढिंढोरा पीटने वाले गवैय्या इमरान, मेरे घर में इतनी गाय और भैंस हैं कि मैं तुम्हें ढाई लाख रूपए दे सकती हूं, ताकि तुम आओ और यहां ठीक वैसे ही दिखावटी आंसू बहाओ जैसे कि तुमने अख़लाक और नजीब के लिए बहाए थे! 

मुझे तुम्हारे पैसों की ज़रूरत नहीं क्योंकि वह पैसे क़ौम के उन दलाल नेताओं से तुमने जमा किए हैं जिनकी ज़ुबान मेरे बेटे की हत्या पर बंद रही! नहीं चाहिए मुझे तुम्हारा ढोंग! मेरे बेटे पहलू खाँ अपने पीछे इतना कुछ छोड़ कर गया है कि मैं और मेरा परिवार उसमें जी सकता है! सबको बता कर मेरी मदद करने की ज़रूरत नहीं है!

नोट: लेखक के निजी विचार हैं, Muslim Aawaz का इससे कोई सरोकार नहीं है!
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