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वक्फ बोर्ड भंग करने में योगी ने कर दी गलती,जाने कैसे ये फैसला सरकार के गले ही हड्डी बनने जा रहा है?



लखनऊ-सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा वक्फ बोर्ड को भंग करने की सिफारिश करने का मामला यूपी शासन के लिए सिरदर्द बन सकता है,ऐसा लग रहा है इतिहास फिर दोहराने जा रहा है,2012 में जब समाजवादी पार्टी सत्ता में आई थी तब भी करप्शन के आरोप लगाकर वक्फ बोर्ड को भंग कर दिया गया था.समाजवादी पार्टी ने वक्फ बोर्ड के सेक्शन 99 को हटाकर वक्फ बोर्ड भंग किया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट में मामला जाने के बाद 2 दिसम्बर,2014 सरकार के फैसले पर रोक लग गयी.

बता दे सयेद वसीम रिज़वी तब भी शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमेंन थे और उन्होंने ही सपा सरकार के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अर्जी देकर वक्फ बोर्ड को भंग करने के फैसले पर रोक लगवा ली थी.

जानिए रिज़वी ने क्या कहा
रिज़वी ने कहा कि वो 2015 में वक्फ बोर्ड के सदस्यों द्वारा दुबारा निर्वाचित हुए है और उनका कार्यकाल पाच साल का है इसलिए सरकार की ऐसी कार्यवाही गैरक़ानूनी है,इस तरह के फैसले से पहले सरकार को नोटिस भेजना भी अनिवार्य है और उन्हें कोई नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है इसलिए योगी सरकार का ये फैसला गैरकानूनी है.

राजनैतिक पंडितो के अनुसार योगी सरकार के इस फैसले के पीछे केन्द्रीय मंत्री मुख़्तार अब्बास नकवी का खासा रोल रहा है,इस तरह की कवायद सुन्नी और शिया वक्फ बोर्ड पर भाजपा नेताओ के नियंत्रण की कोशिश माना जा रहा है भाजपा के करीबी लोगो के मुताबिक सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैंन ज़ुफर अहमद फारुकी और शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिज़वी सपा नेताओ के खासकर आज़म खान के करीबी है इसलिए प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद वक्फ बोर्ड पर नियंत्रण की तैयारी है.

वसीम रिजवी लगातार पाच बार से शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन है योगी सरकार के फैसले के बाद वो इसको दुबारा निश्चित ही चुनौती देंगे,यदि सुप्रीम कोर्ट ने पिछली बार की तरह इस बार भी फैसला पलट दिया फिर सीएम योगी आदित्यनाथ की किरकरी हो जाएगी.

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