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बेरहम भीड़ के जरिये पिटाई के बाद इफ्तेखार आलम अब भी इंसाफ से महरूम



इफ्तेखार आलम सात तारीख की सुबह से ही अस्पताल में दाखिल हैं। इनकी और इनके एक साथी अली जान की भीड़ ने बेरहमी से पिटाई की गई थी। इफ्तेखार आलम की आंख, पांव और टांगों पर गरही चोट आई हैं। उत्तर प्रदेश के रहने वाले आलम अपने पूरे परिवार के साथ दिल्ली में ही रहते हैं। लेकिन हर दिन मॉब लिंचिंग की खबरे सुनने वाले इफ्तेखार आलम ने शायद सोचा नहीं होगा कि राजधानी में भी खूनी भीड़ उनकी जान लेने की कोशिश कर सकती है।

इफ्तेखार आलम दिल्ली मेट्रो के प्रोजेस्ट में काम करते हैं। कुछ दिन पहले एक रात वह अपने ऑफिस की गाड़ी से एक साइट से दूसरी साइट पर जा रहे थे ,सराय काले खाँ के इलाके में अंदर से निकल रहे थे तो सड़क पर खड़ी एक गाड़ी को हटाने के लिए हॉर्न मारते रहे।

उसके बाद उतर कर देखने लगे कि आखिर मामला क्या है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उसके बाद वहां कुछ लोगों ने उन पर मुसलमान के नाते ताने कसने शुरू कर दिए। अंदाज़न 25 से 30 लोगों ने पाकिस्तानी कह कर मारना शुरू कर दिया। उसके बाद जब पुलिस आई तो इफ्तेखार आलम बंधे हुए मिले।

महारानी बाग़ के अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। पहले कई दिन तो पुलिस टालती रही। कोई एफआईआर नहीं की। यहां तक कि पुलिस ने भीड़ की बजाय उनके खिलाफ ही FIR दर्ज कर ली। FIR दर्ज करवाने के लिए जेएनयू छात्र संघ और सामाजिक कार्यकर्ताओं को धरना प्रदर्शन करना पड़ा। दोस्तों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के दबाव में मुश्किल से पुलिस ने इस 7 तारीख की घटना की एफआईआर अब लिखी है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि मुश्किल से एफआईआर दर्ज हुई लेकिन पुलिस ने उसमें भी बेईमानी की है। एफआईआर में इसे दो लोगों के बीच सामान्य झगड़ा बताया गया है जबकि इफ्तेखार को मुसलमान होने के नाते भीड़ ने बेरहमी से पीटा है। यही नहीं पुलिस आगे की भी कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।

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