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ये देखो भक्तो, मोदी के राज में भारत ने माँस निर्यात में बना डाला रिकॉर्ड, 17 हज़ार टन बढ़ा एक्सपोर्ट






देश में बढते माँस कारोबार को लेकर लोकसभा चुनाव के वक़्त मोदी मनमोहन सरकार पर खूब हमलावर थे। चुनावी रैलियों में माइक के सामने गजब का इमोशनल भाषण जनता को मानो घोलकर पिला देते थे। कहते थे मित्रों- सरकार कह रही है कि बीफ एक्सपोर्ट में हिंदुस्तान नंबर वन है।
मित्रों किस बात पर गर्व किया जा रहा है जानवरों के ख़ून पर। भाईयों बहनों आप का कलेजा रो रहा या नहीं, मुझे नहीं मालुम, मगर मेरा कलेजा ज़रूर चीख़ रहा है। ये तो रही भाषण की बात। हकीकत यह है कि उन्हीं मोदी की सरकार में माँस निर्यात 17 हज़ार टन बढ़ गया है।

ख़ुद सरकार ने दी संसद को दी जानकारी
हिंदी बेवसाइट ‘द वायर’ के अनुसार, सरकार ने संसद में जानकारी दी है कि भारत का मांस निर्यात वर्ष 2016-17 में बढ़कर 13.53 लाख टन हो गया जो पूर्व वित्त वर्ष की समान अवधि में 13.36 लाख टन था। मूल्य के हिसाब से पिछले वित्त वर्ष में निर्यात घटकर 27,184 करोड़ रुपये का रह गया जो वर्ष 2015-16 में 27,528 करोड़ रुपये था।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में राज्यसभा में जानकारी दी कि कि मांस और चमड़े के उत्पादन को रोकने के संदर्भ में उनके मंत्रालय में कोई शिकायत नहीं प्राप्त हुई है।

लेकिन आगे कहा कि भैंस के मांस का निर्यात में कमी आई है। अप्रैल मई 2016-17 के दौरान भैंस मांस का निर्यात 55.4 करोड़ रुपये था। जबकि चालू वर्ष की समान अवधि में यह निर्यात 53 करोड़ रुपये ही रह गया। उन्होंने कहा कि चर्म उत्पादों और जूते चप्पलों का निर्यात वर्ष 2015-16 और वर्ष 2016-17 के दौरान विभिन्न कारणों से घटा है जिसमें यूरोपीय बाजार में मंदी, पश्चिम एशिया के देशों की अक्षमता जैसे कुछ बाय कारण शामिल हैं.

गोमांस की कोई कमी नहीं
उत्तर भारत में गोरक्षा अभियान चलाने वाली भाजपा की पूर्वोत्तर और गोवा आदि राज्यों की सरकारों ने जनता से कहा था कि वह सत्ता में आएगी तो गोमांस की कोई कमी नहीं होने देगी। दो दिन पहले ही गोवा विधानसभा में भाजपा नेता और मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा था कि गोवा में गोमांस की कोई कमी नहीं है, होगी तो कर्नाटक से आयात कर लेंगे।




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