Breaking news-इलाहबाद हाईकोर्ट में दायर हुई ऐसी याचिका की योगी को छोड़नी पड़ सकती है मुख्यमंत्री की कुर्सी!
आज आदित्यनाथ योगी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं लेकिन उनकी छवि है एक कट्टर हिंदुत्व की रही है और अयोध्या जाकर ये कहना कि सबसे पहले मैं रामभक्त हूं, उनकी सोच को दर्शाता है. किसी सूबे का मुख्यमंत्री होना इस बात की तरफ इशारा करता है कि वो व्यक्ति किसी खास धर्म नही बल्कि सभी सम्प्रदाय से ताल्लुक रखता है. वैसे आपको बता दें कि CM योगी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. 28 जुलाई को खबर आई कि नवाज शरीफ भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने के के कारण प्रधानमन्त्री से हट गये हैं, ठीक वैसा ही कुछ मामला योगी के साथ भी हो सकता है अगर कोर्ट योगी के खिलाफ फैसला सुनाता है तो.
दरअसल मामला सांप्रदायिक दंगे से जुड़ा है, साल 2007 में गोरखपुर में दंगे हुए थे और उसमें योगी का नाम सबसे ऊपर था. उस वक्त योगी महज बीजेपी के एक सांसद हुआ करते थे और अपनी राजनितिक गोटियाँ सेट करने में लगे और लोगों को एक दूसरे के खिलाफ भड़का रहे थे. इस दौरान हुए दंगों के मामले में अब उनके खिलाफ परवेज परवाज और असद हयात ने नामक शख्स ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मुकदमा चलाने की मांग की है. बीते शुक्रवार को कोर्ट में दाखिल याचिका पर सुनवाई को लेकर खूब बहस हुई.
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस कृष्ण मुरारी की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए ने अगली तारीख 31 जुलाई को दी है. इस याचिका में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ दंगे के आरोप में मुकदमा चलाने की है मांग की गयी है. आपको बता दें कि मुख्यमंत्री योगी के ऊपर भड़काऊ भाषण देने का आरोप है. अगर पूरे मामले की बात करे तो साल 2007 में 26 और 27 जनवरी की रात को गोरखपुर में मोहर्रम का जुलुस निकल रहा था. इस जुलूस के निकलते समय अचानक से दो पक्षों में विवाद शुरू हो गया और माहौल ख़राब हो गया. बात इतनी आगे बढ़ी कि खून खराबा होने लगा. मौके पर पुलिस मौजूद रही लेकिन बावला थमने का नाम नही ले रहा था. भीड़ ने ऐसा रूप अख्तियार कर लिया था पुलिस के सामने ही एक व्यक्ति की हत्या कर दी.
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इसके बाद गोरखपुर का माहौल पूरा ख़राब हो चुका था और घटना ने पूरा सांप्रदायिक रंग ले लिया. अगले दिन योगी और बीजेपी के बड़े नेताओं महाराणा प्रताप चौराहा पर एक सभा और भड़काऊ भाषण दिए. योगी पर आरोप है कि उनके भाषण के बाद ही दंगा भड़क गया. इस मामले में योगी आदित्यनाथ के खिलाफ 302, 153ए, 153बी, और 295, 295बी, 147 और 143, 427, 452 के अंतर्गत कैण्ट थाना में मुकदमा दर्ज किया गया था. अगर कोर्ट उन्हें दोषी मानता है तो योगी को मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ सकती है.