गौआतंकियों पर रवीश कुमार का वार, टीवी देखकर वहशी बने लोग मुसलमानों की हत्या नहीं कर रहे बल्कि....
रवीश कुमार ने अपने एक एडिटोरियल में एक किस्सा लिखा, एक मिठाई की एक छोटी सी दुकान पर गया। ख़ाली दुकान थी और गली में थी। टीवी चल रहा था. टीवी पर धार्मिक गौरववाद का बखान करने वाला कवि सम्मेलन चल रहा था।
दुकानदार अकेले में चिल्ला रहा था. मारो इनको. इन मुसलमानों को मारो तभी ठीक होंगे.मैं टीवी के इस असर को जानता हूं मगर आंखों से देखकर सन्न रह गया.दुकानदार की आंखें लाल हो गई थी. उसे टोका कि ये क्या कर रहे हैं, अकेले में मारो मारो चिल्ला रहे हैं, एक दिन किसी बात पर हत्या कर बैठेंगे।
देश में ऐसा कुछ नहीं हुआ है कि आप टीवी देखते वक्त वहशी हो जाएं. दुकानदार तो शर्मा गया लेकिन उसके भीतर टीवी ने जो ज़हर भरा है, वो क्या मेरे समझा देने से कम हो जाएगा.बिल्कुल नहीं.
मुस्लमान नहीं आप मर रहे हैं
रवीश कुमार ने अपने लेख में आगे लिखा भारत में एक तरह का POLITICAL RAGE पैदा किया जा रहा हैसावधान हो जाइय. मुसलमान से शिकायत है तो उससे ज़रूर कहिए, हंगामा भी कीजिए मगर ऐसी किसी कविता या कहानी की कल्पना में मत उतरिये जहां आप किसी को मारने का ख़्वाब देखने लग जाएं. इस प्रक्रिया में मुसलमान नहीं मर रहा है, आप मर रहे हैं.
