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क्या अब राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलने के पहले उन्हें भी साबुन भेजेंगे योगी आदित्यनाथ ?






भाजपा के रामनाथ कोविंद देश के नए राष्ट्रपति बन गए हैं। गुरुवार को आए चुनाव परिणाम में उन्होंने विपक्ष की उम्मीदवार मीरा कुमार को हराकर यह जीत हासिल की है। कोविंद की जीत के साथ ही इस बात की भी चर्चा हो रही है वह दलित समुदाय से आते हैं। भाजपा ने तो कोविंद को उम्मीदवार बनाने के साथ ही इस बात का प्रचार करना शुरू कर दिया था कि वह एक दलित नेता हैं।

कोविंद की जीत के बाद टीवी पर एक बहस के दौरान भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि उनकी पार्टी ने कोविंद को राष्ट्रपति बनाकर दीनदयाल उपाध्याय और गांधी जी के दलित पहले के विचारों का पालन किया है।

इस बात से किसी को इनकार नहीं कि महामहिम रामनाथ कोविंद दलित समुदाय से आते हैं। लेकिन कोविंद जी उत्तर प्रदेश से आते हैं जहां के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं। ऐसे में योगी और कोविंद की मुलाकात होना तय है। शिष्टाचार के नाते ही सही योगी नए राष्ट्रपति कोविंद से जरुर मुलाकात करेंगे, और करना भी चाहिए।

लेकिन अब सवाल यहां उठता है कि क्या कोविंद से मुलाकात से पहले योगी उन्हें भी साफ सूथरा होने के लिए साबून और शैम्पू भेजेंगे? क्या योगी आदित्यनाथ और उन जैसे भाजपा और संघ के नेताओं से मुलाकात से पहले कोविंद को विशेष तौर पर स्वच्छ होना होगा।

ये बात हम यूं ही नहीं कह रहे हैं। ऐसे पहले हो चुका है। आपको बता दें कि इसी वर्ष जून में योगी आदित्यनाथ यूपी के कुशीनगर जिले के मैनपुर कोट दीनापट्टी गांव में दलितों से मिलने उनके घर गये थे। मुख्यमंत्री के आगमन से पहले अधिकारियों ने वहां के दलितों को नहाने के लिए साबुन, शैम्पू और डियो बांटा और निर्देश दिया था कि मुख्यमंत्री के सामने साफ होकर आएं ताकि उनके शरीर से बदबू न आए। इस घटना पर बड़ा विवाद हुआ था और देश भर के दलित समाज में नाराजगी हो गई थी।।

इससे नाराज गुजरात के दलितों ने अपना विरोध जताने के लिए उन्हें 125 किलो वजन का साबुन भेजा था। गुजरात के दलित संगठनों ने इसे दलितों का अपमान मानते हुए योगी आदित्यनाथ को इस सलाह के साथ 16 फीट लंबा साबून भेजा था कि वह 9 जून को अहमदाबाद में होने वाले समारोह में खुद को साफ़ करके आएं।

साबुन भेजवाने वाले संगठन ने ये भी कहा था कि कुशीनगर में हुई घटना में सरकार की जातिवादी मानसिकता साफ नजर आती है। हालांकि राज्य प्रशासन ने गुजरात से साबून लेकर आए दलित समुदाय के लोगों को लखनऊ पहंचने से पहले ही हिरासत में ले लिया था।

ऐसे में भाजपा लाख दलित को राष्ट्रपति बनाने का दावा कर ले लेकिन उसकी मानसिकता ऐसी घटनाओं से साफ हो जाती है




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