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योगी जी के बड़े बोल तो सुनिए, कब तक सच से भागेंगे सीएम साहब..क्या कहा जाने






उत्तर प्रदेश की सत्ता में आने के बाद आदित्यनाथ योगी सरकार जिस मुद्दे पर सबसे ज़्यादा नाकाम रहने के आरोप झेल रही है, वह है- कानून व्यववस्था ! आंकड़े सबके सामने है, विपक्ष का पलटवार भी जारी है पर योगी जी ने तो आँखों पे पट्टी और मुंह पर भाजपा की भक्ति को कस कर बाँध रक्खा है ! सब कुछ देख कर भी अनजान बनने वाले सीएम अपनी तेज़ तर्रार छवि को खतरे में देख कर शायद अंदर ही अंदर भयभीत हो चुके है !

यूपी में अपराध दर भाजपा के आने से इस कदर बढ़ा जिसकी उम्मीद भी किसी को भी नहीं थी ! यूपी चुनाव से पहले भाजपा के मेनिफेस्टो में एक उत्तर प्रदेश में अपराध दर कम करना भी था पर सरकार अबतक अपनी इस बात पर बुरी तरह से नाकाम नजर आ रही है !

गौरतलब है की विधानसभा में एक सवाल के जवाब में संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि सरकार के गठन से लेकर 9 मई तक राज्य में कुल 729 हत्याएं, 803 बलात्कार, 60 डकैती, 799 लूट और 2682 अपहरण की घटनाएं हुई हैं ! हालांकि विपक्षी दल इसी दौरान पिछले सालों में हुए अपराध का तुलनात्मक ब्यौरा चाहते थे लेकिन सरकार के पास वो उपलब्ध नहीं थे ! विपक्ष का दावा है कि बीते सालों की तुलना में अपराध में तीस फ़ीसदी से ज़्यादा की बढ़ोत्तरी हुई है !

सपा नेता राजेंद्र चौधरी कहते हैं, ”अखिलेश यादव के समय में देश के 18 राज्यों से ज़्यादा अच्छी कानून व्यवस्था उत्तर प्रदेश में थी, यह नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो का आंकड़ा था !

ख़ुद मुख्यमंत्री योगी ने सदन में कहा कि अपराध बढ़े नहीं हैं बल्कि वो बढ़े हुए इसलिए दिख रहे हैं कि क्योंकि पहले अपराध दर्ज नहीं होते थे, जबकि अब अपराध दर्ज हो रहे हैं ! विधानसभा में ये बात कहते हुए योगी ने सीधे तौर पर बीएसपी और समाजवादी पार्टी की ओर इशारा किया ! योगी ने यह भी कहा कि हत्या की घटनाओं में पिछले साल की तुलना में पांच फ़ीसदी की कमी आई है ! ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पुलिस और प्रशासन को सरकार इस बारे में निर्देशित करती है कि मामले दर्ज किए जाएं या नहीं !



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