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मुस्लिमों और दलितों पर हो रहे हमलों के खिलाफ रिटायर्ड सैनिकों ने लिखा पीएम मोदी को खुला ख़त






The Prime Minister, Shri Narendra Modi writes in the Visitors Book at 14 Corps HQ. , at Leh on August 12, 2014. The Chief of Army Staff, General Dalbir Singh is also seen.

देश में मुसलमानों और दलितों पर होने वाले हमलों के बीच भारतीय सशस्त्र बल के रिटायर्ड सैनिकों ने प्रधानमंत्री मोदी को खुला पत्र लिखा है। पत्र में पूर्व सैनिकों ने उन हमलों की निंदा करते हुए निराशा जताई है। इसके साथ ही सैनिकों ने हिंदुत्व की रक्षा के लिए स्वयंसेवकों और उनकी ओर से बर्बर हमलों की तीव्र आलोचना की है।

खुले पत्र में इन सैनिकों ने कहा है कि वह इस बर्बरता के खिलाफ ‘नॉट इन माई नेम’ अभियान के साथ खड़े हैं। पत्र में लिखा है कि देश के सशस्त्र बल अभी भी ‘अनेकता में एकता’ के सिद्धांतों पर विश्वास रखती है। उन्होंने कहा कि देश की मौजूदा स्थिति डराने वाली, घृणित और संदिग्ध है।इस पत्र में सशस्त्र बलों यानी सेना, नौसेना और वायुसेना के 114 रिटायर्ड सैनिकों के हस्ताक्षर हैं।

दिग्गजों ने अपने पत्र में लिखा है:

‘आज हमारे देश में जो हो रहा है उससे देश के सशस्त्र बलों और संविधान को धक्का लगा है। हिंदुत्व की रक्षा के लिए स्वयंसेवकों के हमलों में वृद्धि हुई है। ‘उन हमलों को हम समाज में अनपेक्षित तौर पर होता हुआ देख रहे हैं। हम मुसलमानों और दलितों पर होने वाले हमलों की निंदा करते हैं।

‘हम लोग मीडिया, सिविल सोसाइटी समूह, विश्वविद्यालय, पत्रकार और बुद्धिजीवियों के अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमले, एक अभियान द्वारा उन्हें देश विरोधी बताए जाने और उनके खिलाफ हिंसा पर सरकार की चुप्पी की निंदा करते हैं।

‘हम दिग्गजों का एक समूह है, जिन्होंने अपनी पूरी जीवन देश की सेवा करते हुए बिताई है। संगठित रूप में हम किसी राजनीतिक पार्टी से संबंध नहीं रखते। हमारा साझा प्रतिबद्धता केवल भारत के संविधान की पदोन्नति है।’इस पत्र को लिखने में हमें परेशानी हो रही है लेकिन भारत में होने वाले हालिया घटनायें जो देश को विभाजित कर रही हैं, उन पर होने वाली तकलीफ का इज़हार भी ज़रूरी है।

सशस्त्र बल ‘ अनेकता में एकता’ पर विश्वास रखती है। सेना में अपनी सेवाओं के दौरान न्याय, खुलेपन का एहसास है और निष्पक्ष व्यवहार ने हमें सही कदम उठाने की राह दिखाई है। हम एक परिवार हैं। ‘हमारी विरासत में कई रंग हैं, यही भारत है और हम इस जीवित विविधता को संभाल कर रखते हैं।’अगर हम सेक्युलर और उदारवादी मूल्यों के पक्ष में नहीं बोलेंगे तो हमारे देश का ही नुकसान होगा। हमारी विविधता ही हमारी ताकत है। ‘हम केंद्र और राज्य सरकारों से अपील करते हैं कि हमारे चिंताओं पर विचार करें और हमारे संविधान की भावना का सम्मान करें।’



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