मुंबई आज हम बात कर रहे है भारतवर्ष जे एक ऐसे राजा कि जो था तो विदेशी लेकिन उसका जन्म हिंदुस्तान में ही हुआ और इस राजा ने भारत वर्ष के लोगो कि मुस्लिम राजा के प्रति राय ही बदल कर रख दी थी ।जी है हम किसी और कि नहीं हिंदु मुस्लिम सोहर्द को फेलने वाले राजा मोहम्मद जलालुद्दीन अकबर कि । वक़्त के साथ साथ राजगद्दी कि प्रथा तो समाप्त हो गयी पर उन राजाओं कि पीढ़ी का क्या हुआ यह हर किसी को सोचने के लिए मजबूर कर देती है ।
यह है अकबर महान कि बाहरवीं पीढ़ी और १८५७ कि क्रांति के नायक बहादुर शाह जफ़र कि तीसरी पीढ़ी के पोते
इनका पूरा नाम है प्रिंस याकूब ज़िआउद्दीन तुसी जिनको हिंदुस्तानी सरकार ऑफिसियल सर्टिफिकेट दे चुकी है कि यही मुग़ल पीढ़ी के अगले राजा है , जिन्हे जेड प्लस सिक्योरिटी मिली हुई है यह अपने महल में रहते है तहा इनके कई फार्म हाउस और जमीने है यह एक राजा कि तरहा ही रहते है इनकी कई होटल म्यूजियम प्रॉपर्टी रियल एस्टेट और कई तरहा के व्यपार है इनके वैपार इंटरनेशनल लेवल तक फैले है , हर साल ताज महल में होने वाले उर्स के साथ साथ मुग़ल बादशाहो के हर उर्स कि शुरुवात इन्ही के हाथों से होती है ।अकबर बादशाह कि ही तरहा ये शाही तहत बात से अजमेर जाते है और देश के हक़ में दुआ करते है ।
अपने पूर्वजो की ज़मीन जायदाद कर दी दान
हम आपको बताते हे की इतिहास सलाहकारों की मने तो भारत सरकार की कुल का पच्चीस प्रतिशत हिस्सा मुगलो के द्वारा बनाये गए भवनों और म्यूजियम से आता हे , अब भारत सारकार ने प्रिंस याकूब को मुग़ल वंशज मानते हुए सेर्टिफिकेट दे दिया हे तो वह अपने पूर्वजो की जमीं जायदाद पर हिस्सा मांगने के लिए केस कर सकते है , लेकिन प्रिंस याकूब ने इन सब बातो का खंडन करते हुए कहा की यह सब अब भारत सर्कार की हे बस हमारी भारत सरकार से यही गुजारिश हे की वह इन सब चीजों का रखरखाव अच्छे तरीको से करे ।