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योगी का फरमान हुआ बे असर बरेली के लगभग 150 से ज्यादा मदर से नहीं करेंगे राष्ट्रगान, क्या है वजह?






बरेलवी मसलक से जुड़े करीब 150 मदरसों में उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश के विपरीत कल स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रगान नहीं गाया जाएगा और ना ही समारोह की वीडियोग्राफी होगी। मसलक के सबसे बड़े श्रद्धा के केन्द्र दरगाह आला हजरत परिसर में आज हुई जमात रजा-ए-मुस्तफा की बैठक में यह फैसला किया गया।

जमात के महासचिव मौलाना शहाबउद्दीन रिजवी ने पीटीआई को बताया कि दरगाह आला हजरत परिसर में हुई जमात की एक बैठक यह फैसला लिया गया कि जश्न-ए-आजादी को धूमधाम से मनाया जाएगा। कल मदरसों में तिरंगा फहराया जाएगा, मिठाई बांटी जाएगी और आजादी की लड़ाई में कुर्बानी देने वालों को खिराज-ए-अकीदत पेश की जाएगी लेकिन राष्ट्रगान गाने और समारोह की वीडियोग्राफी कराने जैसा कोई भी ‘गैर शरई’ काम नहीं किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि बैठक में लिये गये फैसले में ‘जन गण मन’ की जगह कौमी तराना ‘सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा’ गाया जाएगा। वीडियोग्राफी गैर शरई काम है, लिहाजा इसे बिल्कुल नहीं किया जाएगा। जितने भी कार्यक्रम होंगे वे सब शरीयत के दायरे में रहकर होंगे। रिजवी ने बताया कि इस बैठक में उत्तर प्रदेश और दूसरे राज्यों से आये हुए करीब 150 से ज्यादा मदरसों के उलमा ने शिरकत की। इनमें से ज्यादातर बरेलवी मसलक से जुड़े हैं।

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड के रजिस्ट्रार राहुल गुप्ता ने गत तीन अगस्त को राज्य के सभी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को जारी एक सर्कुलर में कहा था कि राज्य के सभी मदरसों में तिरंगा फहराकर राष्ट्रगान गाया जाएगा और इस कार्यक्रम की वीडियोग्राफी की जाएगी। अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख ने कहा था कि जिन मदरसों में सरकार के इस आदेश का पालन नहीं होगा, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने एक सवाल पर कहा कि जन गण मन में ‘अधिनायक’ शब्द गैर शरई है। यह वर्ष 1911 में अंग्रेजों की शान में पढ़ा गया कसीदा है, लिहाजा इसे गाना शरई लिहाज से दुरुस्त नहीं है। रिजवी ने बताया कि राज्य सरकार ने माध्यमिक शिक्षा परिषद, बेसिक शिक्षा परिषद और उच्च शिक्षा महकमे के तहत आने वाले स्कूल, कालेजों को कोई सर्कुलर नहीं जारी किया है। इसे सिर्फ मदरसों को ही यह क्यों जारी किया गया।

उन्होंने कहा कि खुद बेसिक शिक्षा के सचिव संजय सिन्हा ने बयान जारी करके कहा है कि उन्हें अपने स्कूलों पर भरोसा है लिहाजा उनमें स्वाधीनता दिवस समारोह की कोई वीडियोग्राफी नहीं होगी। ऐसे में क्या मदरसों के लिये रखी गयी शर्त उनकी देशभक्ति पर संदेह की तरफ इशारा नहीं करती है।







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