म्यांमार जनसंहारः बर्मा के खिलाफ तुर्की, ईरान समेत पांच मुस्लिम देश हुऐ एकजुट
रोहिंग्या संकट पर चुप्पी साधने वाली म्यांमार की नेता सू ची ने पिछले हफ़्ते दावा किया था कि मीडिया में रोहिंग्या मुसलमानों के संकट के बारे में ग़लत रिपोर्टिंग हो रही है। उन्होंने कहा था कि हमारे देश में समस्त लोगों के अधिकारों की सुरक्षा की जाती है। दुनिया भर में शांति का नोबल पुरस्कार हासिल करने वाली सू ची की इन बयानों को लेकर कड़ी निंदा की जा रही है और मांग की जा रही है कि उनसे शांति का नोबल पुरस्कार वापस लिया जाए।
ईरान के राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी ने कहा है कि इस्लामी सहयोग संगठन के सदस्य देश के राष्ट्राध्यक्ष, रोहिंग्या पलायनकर्ताओं की सहायता की आवश्यकता तथा मुसलमानों के जनसंहार को रुकवाने के लिए म्यांमार सरकार पर दबाव डालने पर एकमत हैं। डाक्टर हसन रूहानी क़िरक़िज़िस्तान की राजधानी आस्ताना में विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में ओआईसी के शिखर सम्मेलन तथा रोहिंग्या मुसलमानों की समीक्षा के लिए आयोजित विशेष बैठक में भाग लेने के बाद स्वदेश लौट आए।
उन्होंने तेहरान हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि रोहिंग्या मुसलमानों के जनसंहार को रोकने के लिए म्यांमार सरकार पर दबाव डालने के बारे में इस्लामी सहयोग संगठन के सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष एकमत हैं। उन्होंने कहा कि क़ज़ाक़िस्तान, तुर्की, आज़रबाइजान गणराज्य और उज़बेकिस्तान के राष्ट्राध्यक्षों से द्विपक्षीय मुलाक़ात में अत्याचार ग्रस्त रोहिंग्या मुसलमानों की स्थिति पर इस्लामी जगत के गंभीर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
डाक्टरर हसन रूहानी ने इस अवसर पर कहा कि म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमानों को बहुत बड़ी त्रासदी का सामना है जिसे त्वरित रोकने की आवश्यकता है। ईरान के राष्ट्रपति ने इस्लामी देशों के प्रमुखों पर बल दिया है कि वह प्रभावित रोहिंग्या मुसलमानों और शरणार्थियों के मामले को त्वरित हले करने के लिए मिलकर प्रयास करें।
