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म्यांमार जनसंहारः दुनिया के दबाव के आगे झुका म्यांमार, रोहिंग्या मुसलमानों को राहत देने को तैयार






नई दिल्ली – म्यांमार के रखाईन में जारी हिंसा के बीच खबर आई है कि म्यांमार की सरकारी मीडिया के अनुसार सरकार देश के अंदर राखिने प्रान्त में विस्तापित हुए रोहिंग्या मुस्लिमो को राहत और ज़रूरी साज़ो सामान देने के लिए तैयार है. राखिने प्रान्त में सुरक्षा बलो की कार्यवाही के 16वे दिन म्यांमार ने पहली बार इस प्रकार का एलान किया है,इस एलान के बाद ऐसा माना जा रहा है तुर्की,इंडोनेशिया ,मलेशिया समेत यूएन द्वारा म्यानमार में पीड़ित रोहिंग्या मुस्लिमो को राहत सामग्री पहुचाने का रास्ता साफ़ हो गया है.

अब तक राखिने प्रान्त में हिंसा के बाद पडोसी देश बंगलादेश में दो लाख सत्तर हज़ार लोग पलायन कर चुके है,बांग्लादेश समेत दुनिया के कई देशो ने म्यांमार पर दवाब डाला था कि वो राखिने प्रान्त में रोहिंग्या आबादी को एक सेफ जोन दे जहाँ राहत सामग्री पहुचाई जा सके.

वही Global New Light of Myanmar नाम की रेड क्रॉस सोसाइटी ने म्यांमार के इस एलान का स्वागत किया है और कहा है कि अब म्यांमार के राखिने प्रान्त में पीड़ित रोहिंग्या मुस्लिमो को मदद पहुचाने में कोई दिक्कत नही आएगी. यूएन की तरफ से म्यांमार में ह्यूमन राईट के प्रमुख Yanghee Lee ने कहा है कि अब तक एक हजार से ज्यादा लोग राखिने में मारे गये है.

वही अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति ने कहा है कि उनके कर्मचारियों ने म्यांमार और बांग्लादेश में शरणार्थी संकट में मदद के अपने प्रयास तेज कर दिए हैं. समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, आईसीआरसी ने शुक्रवार को कहा कि संस्था उन परिवारों को लेकर गंभीर रूप से चिंतित है, जो 25 अगस्त से म्यांमार में जारी हिंसा से भाग कर बांग्लादेश में पनाह ले रहे हैं.

आईसीआरसी के एशिया और प्रशांत क्षेत्र के क्षेत्रीय निदेशक बोरिस माइकल ने कहा,”इस हिसा से प्रभावित सभी समुदाय कष्ट झेल रहे हैं” आईसीआरसी ने कहा कि उन्होंने इस हफ्ते से हिसा के बाद घर से भागे करीब आठ हजार परिवारों को भोजन-पानी की आपूर्ति शुरू कर दी है.ये परिवार म्यांमार और बांग्लादेश सीमा के दोनों तरफ मौजूद हैं.

बांग्लादेशी चिकित्सकों और अर्धचिकित्सकों वाले आईसीआरसी समर्थित एक सचल स्वास्थ्य दल को बांग्लादेश के इन क्षेत्रों में भेज दिया गया है,आईसीआरसी ने शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा, “आईसीआरसी म्यांमार रेड क्रॉस सोसायटी (एनआरसीएस), बांग्लादेश रेड क्रीसेंट सोसायटी (बीडीआरसीएस), और सामुदायिक स्वयंसेवकों के साथ मिलकर नजदीकी तौर पर इस आपात स्थिति में काम कर रही है”




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