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रोहिंग्या मुसलमानों के नरसंहार के ख़िलाफ़ लखनऊ में ज़बरदस्त प्रदर्शन





म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमानों के नरसंहार और म्यांमार सरकार की बर्बरतापूर्ण कार्यवाहियों एवं चरमपंथी बौद्ध तथा इस देश की सेना द्वारा की जा रही आतंकी कार्यवाहियों के ख़िलाफ़ लखनऊ में जुमे की नमाज़ के बाद ज़बरदस्त विरोध प्रदर्शन हुआ।

प्राप्त समाचारों के अनुसार भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की ऐतिहासिक आसफ़ी मस्जिद में जुमे की नमाज़ के बाद मजलिसे ओलमाए हिन्द के आह्वान पर आयोजित प्रदर्शन में हज़ारों की संख्या में लोगों ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने म्यांमार सरकार और शांति का नोबल पुरस्कार पाने वाली आन सांग सूची के ख़िलाफ़ जमकर नारे लगाए।

ओलमाए हिन्द के महासचिव और इमामे जुमा लखनऊ और भारत में शिया मुसमलानों के वरिषठ धर्मगुरू मौलाना सैयद कल्बे जवाद नक़वी ने म्यांमार सरकार के अत्याचार तथा इस देश के बौद्ध चरपंथियों और सेना के आतंक की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि आख़िर म्यांमार में मुसलमानों के नरसंहार और सैन्य आतंकवाद पर संयुक्त राष्ट्र संघ और अन्य मानवाधिकार संस्थाएं कड़े कदम क्यों नहीं उठातीं।

मौलाना कल्बे जवाद ने कहा कि 34 मुस्लिम देशों का गठबंधन भी रोहिंग्या मुसलमानों के नरसंहार पर मूकदर्शक बना बैठा है। उन्होंने कहा कि यदि यह गठबंधन मुसलमानों पर हो रहे अत्याचारो व हिंसाओं के ख़िलाफ़ आवाज़ नहीं उठा सकता तो इस गठबंधन का क्या फ़ायदा है?

मजलिसे ओलमाए हिन्द के महमासचिव ने भारत सरकार से यह अपील करते हुए कहा कि हमारा देश हमेशा मज़लुमों का साथी रहा है इस लिये हमारी सरकार को चाहिये के वह म्यांमार में मुसलमानों के नरसंहार और सेना की बर्बरतापूर्ण कार्यवाहियों के ख़िलाफ़ अपने अधिकारों का पूरा उपयोग करे और मुसलमानों के संरक्षण के लिए हर संभव क़दम उठाए।

मौलाना कल्बे जवाद ने संयुक्त राष्ट्र से मांग करते हुये कहा कि म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमानों के नरसंहार को रोका जाए और उनकी जान-माल तथा इज़्ज़त की रक्षा को सुनिश्चित बनाया जाए एवं म्यांमार सरकार पर और इस देश की सेना पर अंतर्राष्ट्रीय अदालत में मुक़द्दमा चलया जाए।

प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए मौलाना रज़ा हुसैन ने कहा कि म्यांमार में मुसलमानों का क़त्लेआम किया जा रहा है लेकिन दुनिया चुप है, क्या मुसलमान की जान, जान नहीं होती है, आख़िर जब मुसलमानों पर अत्याचार होता है तब पुरी दुनिया मूकदर्शक क्यों बन जाती है? मौलाना ने कहा कि हम केवल मुसलमानों पर हो रहे अत्याचार का विरोध नहीं करते बल्कि दुनिया में जहां भी अत्याचार हो रहा है चाहे वह किसी भी धर्म और जाति के व्यक्ति पर हो उसकी निंदा करते हैं, लेकिन आशचर्य तब होता है जब देखते हैं कि दुनिया, मुसलमानों के नरसंहार पर मूर्कदर्शक बनी रहती है?
साभार-पारस




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