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सिख भाइयों ने पेश की इंसानियत की मिसाल, बांग्लादेश बॉर्डर पहुँच खिलाया लंगर






रोहिंग्या मुसलमानों की मदद के लिए सिख समुदाय के लोग आगे आए। सिख संगठन खालसा एड के वॉलिन्टियर्स रविवार रात को बांग्लादेश-म्यामांर के बॉर्डर पर पहुंचे और म्यामांर से आए लाखों शरणार्थियों की मदद में जुटे। सिख वॉलिन्टियर्स इन शरणार्थियों के लिए खाने-पीने और रहने के लिए भी मदद कर रहे हैं।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, खालसा संगठन के मैनेजिंग डायरेक्टर अमरप्रीत सिंह ने कहा है कि हमने कैंप शुरू करने से पहले यहां के हालात का जायजा लिया। यहां शरणार्थियों बहुत बुरी हालत में हैं। संगठन ने बताया कि हम 50,000 लोगों की सहायता के लिए सहायता सामग्री लाए थे, लेकिन यहां 2 लाख से ज्यादा की तादाद में लोग हैं जो बिना खाने, पानी और छत के रह रहे हैं।

बांग्लादेश बॉर्डर के गांव टेकनफ में रोहिंग्या शरणार्थी कैंप में रह रहे हैं। सिख समाज हमारी मदद की कोशिश जारी है। भारत में मुसलमानों पर हो रहे ज़ुल्म पर मुसलमानों के साथ अन्य धर्मों के लोगों ने भी अपना व्यवसाय बंद कर दिया। वहीं सर्वदलीय संगठन की ओर से एसडीएम को एक मेमोरेन्डम भी पेश किया गया, जिसमें रोहिंग्या मुसलमानों पर किए जा रहे अत्याचार को रोकने की मांग की गई। बल्गाम के मुसलमानों ने बर्मा में रोहिंग्या मुसलमानों पर हो रहे उत्पीड़न के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

प्रदर्शनकारियों ने फोर्ट रोड से जिला कलेक्टर कार्यालय तक रैली निकाली और जिला आयुक्त के माध्यम से केंद्र सरकार से अनुरोध किया। मालेगांव शहर में जबरदस्त विरोध देखने को मिला सुन्नी संगठनों की ओर से शहर के डॉक्टर बाबा साहेब अंबेडकर प्रतिमा से पैराडाईज़ स्कूल तक एक मानव श्रृंखला बनाकर बर्मा सरकार की निंदा की गई। सुन्नी संगठनों ने भारत सरकार से मांग की है कि भारत में चालीस हज़ार रोहिंगया मुसलमान हैं उन्हें आश्रय दिया जाए।

हाल ही में हुई इस्लामी देशों के राष्ट्राध्यक्षों की बैठक में म्यांमार में जारी हिंसा को समाप्त कराने की मांग की गई। इस्लामी सहयोग संगठन की शिखर बैठक के घोषणापत्र में म्यांमार हिंसा को समाप्त करने पर बल दिया गया। क़ज़ाक़िस्तान के आस्ताना नगर में ओआईसी की शिखर बैठक में रोहिंग्या मुसलमानों की स्थिति की गहन समीक्षा की गई।




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