जब भगत सिंह ने अंग्रेज़ जज से कहा था, मुसलमानों ने इस देश को सोने की चिडिया बनाया हैं, और तुम उसे लुटने आये हो
भगत सिंह मुस्कुराये और कहा,
“मुसलमानों ने हम पर हुकूमत की, और ऐसी हुकूमत की कि हमारे देश को सोने की चिड़िया बना दिया, और ऐसा सोने की चिड़िया बनाया कि इस चिड़िया की चहचहाहट आपको सात समंदर पार से यहां खींच लायी, और जज साहब आपने 150 साल यहाँ कैसे राज किया, उसको एक लाइन मे कहना चाहूं तो आपने एक स्पंज की तरह राज किया ये स्पंज गंगा के
किनारे से हीरे मोती चूस कर ले जाता और इसे जब थेम्स (लंदन की नदी) के किनारे निचोड़ा जाता तो दौलत बरसने लगती ये जो दौलत आप यहां से भिगो-भिगो कर ले गये हैं आज (आपके यहां) सारी औधोगिक क्रांति और कारखाने उसी से आये हैं और इन मुग़लों और पठानों ने हमारे देश पर ऐसा राज किया कि इसे अपना घर बना लिया और इसी की धूल (मिट्टी) मे अपने आपको मिला दिया जो पैसा यहां से लिया यहीं पर खर्च कर दिया और इस देश को सोने की चिड़िया बना दिया”
(ग्रोवर एंड ग्रोवर पेज 169)
आज के झूटे भक्त उस सच्चे भगत से सबक लें जिसने मुग़लों को देश का गद्दार और लुटेरा नहीं बल्कि सच्चा देशभक्त माना और उनके अहसानों को भी सच्चे दिल से कुबूल किया
अंग्रेज जज ने हालाँकि वहां भी हिंदू मुस्लिम कार्ड खेला और सोचा कि यहाँ भी हिन्दू मुस्लिम को लड़ाने की कोई बात की जाये लेकिन भगतसिंह की मज़बूत दलील और ठोस बातों ने उसके मुंह पर ऐसा करारा तमाचा मारा जिससे उसकी बोलती बंद हो गयी
भगत सिंह ने आज के जाहिलों की तरह ये नहीं कहा कि
मुसलमान बादशाह भारत को लूटने आये थे और हिन्दुओं को मारनी आये थे क्योंकि वो इन बादशाहों का इतिहास जानते थे
न ये कहा कि बाबर देश का खज़ाना लूटने आया था और हिन्दुओं को मारने आया था क्योंकि वो जानते थे जिस मुस्लिम बादशाह ने गाय की कुर्बानी पर पाबंदी लगवाई थी उसका नाम बाबर था
न उन्होंने ये कहा था कि औरंगजेब कट्टरपंथी था क्योंकि वो जानते थे कि जिस मुगल बादशाह ने सबसे जियादा हिन्दू मंदिरों को जागीरें और वजीफे दिये वो औरंगजेब ही था
न उन्होंने बाबरी मस्जिद को किसी मंदिर पर बना हुआ माना न ताजमहल को तेजो मंदिर कहा
क्योंकि वो भारत का और मुगलों का सारा इतिहास जानते थे
अगर आज भी भगत सिंह जैसे लोग हों तो किसकी मजाल जो मुग़लों को देश का गद्दार कह सके
और किसकी हिम्मत जो मुसलमानों को भारत का लुटेरा साबित कर सके
आज हम लोगों मे ये कमी है कि हम अपना इतिहास पढ़ते नहीं न हमें अपना इतिहास पता है न दूसरों का
तो फिर कैसे हम आज खुद को पहचान पायेंगे और कैसे मुखालिफों को जवाब दे सकेंगे
हमें पढ़ने की ज़रूरत है
