राष्ट्रपति रजब तय्यब एर्डोगन के निर्देशन में हुई आठ विकासशील इस्लामिक देशों की बैठक
तुर्की के राष्ट्रपति रजब तय्यब अर्दोग़ान ने 20 अक्तूबर को इस्लामी देशों के गुट डी-आठ के इस्तांबूल में आयोजित नवें शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच आर्थिक लेन-देन बढ़ाने पर बल दिया।
डी-8 वास्तव में आर्थिक गुट हैं जिसमें ईरान, तुर्की, पाकिस्तान, बंग्लादेश, इंडोनेशिया, मलेशिया, मिस्र और नाइजीरिया सदस्य देश हैं। इस गुट ने सदस्य देशों ने आर्थिक सहयोग में विस्तार के उद्देश्य से 1997 से काम करना शुरु किया। इस उद्देश्य के लिए डी-8 के नवें शिखर सम्मेलन का शीर्षक ‘अवसर बढ़ाने के लिए सहयोग’ रखा गया ताकि इस गुट के सदस्य एक दूसरे के साथ आर्थिक व सामाजिक संबंध बढ़ाने की कोशिश करें।
ख़ास तौर पर इसलिए कि डी-8 के चार्टर में वाणिज्य, उद्योग, संपर्क, सूचना, बैंकिंग, निजीकरण, हाशिए पर चले गए शहरों के विकास, प्रौद्योगिकी और निर्धनता से संघर्ष पर बल दिया गया है।
अगर इस गुट के अंतर्राष्ट्रीय फ़ैसलों में भागीदारी और सदस्य देशों की जनता के लिए जन कल्याण के मानकों को बेहतर करने की कोशिश पर ध्यान दें तब हम इस्लामी जगत में डी-8 के क्रियाकलापों की अहमियत को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। शायद जिस चीज़ ने डी-8 के सदस्यों को यह संभावना मुहैया करायी है कि वे अपने कार्यक्रम को लागू करें वह इस्लामी सहयोग संगठन में इन देशों की सदस्यता है। यह ऐसी स्थिति है जिसने डी-8 को व्यवहारिक रूप से आर्थिक सहयोग संगठन इको और सार्क जैसे क्षेत्रीय संगठनों के बीच संपर्क पुल बना दिया है।
ऐसी संभावनाओं के मद्देनज़र डी-8 के इस्लामी देश व्यापार और कस्टम के क्षेत्र में संबंधों को विस्तार की कोशिश करें और एक पारदर्शी व्यापारिक तंत्र के गठन के मार्ग में मौजूद रुकावटों की दूरी को अपनी कार्यसूचि में क़रार दें। शायद इसीलिए डी-8 के नवें शिखर सम्मेलन में व्यापारिक सहयोग में विस्तार को मुख्य रूप से स्थान दिया गया। यह ऐसा विषय है जिससे प्रेरित होकर तुर्क राष्ट्रपति ने सदस्य देशों को अपनी अपनी राष्ट्रीय मुद्रा में व्यापार करने के लिए आमंत्रित किया
