म्यांमार में मरने वाले सब मुसलमान हैं इसी लिये सारे शक्तिशाली देश चुप हैं- रजब तय्यब एर्दोगान
रजब तैय्यब एर्दोगान ने दुनिया के देशों का ध्यान रोहिंग्या मुसलमानों की तरफ दिलाया, उन्होंने उन रोहिंग्या मुसलमानों का जिक्र किया जो 650000 रोहिंग्या मुसलमान जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। उन्होंने इस पर अफसोस जाहिर किया और आलोचना करते हुए कहा कि “क्या वे जो ताकतवर कहलाते हैं क्या वे इस समस्या को हल नहीं कर सकते ? उन्होंने एक और सवाल किया, क्या वाकई वे नहीं कर सकते?
उन्होंने खुद ही इस सवाल का जवाब देते हुए कहा कि वे शक्तिशाली देश बहुत अच्छी तरह इस समस्या का हल कर सकते हैं, चूंकि मुसलमान मर रहे हैं इसलिए वे इसकी परवाह नहीं करते। एर्दोगान ने सवाल किया कि कौन उन्हें आतंकित कर रहा है ? वे कुछ बौद्ध चरमपंथी ही तो हैं।
तुर्की के राष्ट्रपति ने सवाल किया कि जिस तरह म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों का बोद्ध चरमपंथियों ने नरसंहार किया है अगर ऐसे लोग मुसलमानों से होते, तो वे आतंकवादी कररार दिए जा चुके होते और दुनिया का सबसे बड़ा मुद्दा बन चुके होते। लेकिन जब ऐसे लोग ईसाई , या यहूदी समुदाय से संबंध रखने वाले हों तो उनके खिलाफ एक लफ्ज भी नहीं बोला जाता।”
तुर्की के राष्ट्रपति ने कहा कि आईसिस का इस्लाम से कोई लेना देना नही है, और तुर्की ऐसे तमाम आतंकी संगठनों के खिलाफ सख्ती से जंग लड़ रहा है। एर्दोगान ने कहा कि क्या वो जिन्होंने बोसनिया में होने वाले जुल्म से नजरें चुराईं थीं आज रोहिंग्या मुसलमानों पर होने वाले जुल्म पर भी अंधे और गूंगे हो गये हैं ?
गौरतलब है कि 25 अगस्त को म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ हिंसा शुरु हुई थी इस हिंसा में एक हजार से ज्यादा रोहिंग्या मुसलमानों की हत्याऐं हुई हैं, संयुक्त राष्ट्र ने इसे रोहिंग्या मुसलमानों का नस्ली सफाया बताते हुए म्यांमार सरकार की निंदा की थी। इस हिंसा से प्रभावित लगभग साढ़े छ लाख रोहिंग्या मुसलमानों ने बंग्लादेश समेत दूसरे देशो में शरण ले रखी है।
