योगी जी मुग़लसराय व फैज़ाबाद का नाम नहीं,कुछ शर्म है तो सिद्धार्थनगर आइये और यह बदलिए
प्रत्येक ग्राम पंचायतों की आबादी पांच से बीस हजार के बीच है और ग्राम पंचायतों के परिसीमन में भी यहां फेरबदल नहीं किया गया था जबकि नए परिसीमन में एक हजार आबादी पर ग्राम पंचायतें बननी थी। अंग्रेजों के शासनकाल में विल्यिम बर्ड बर्डपुर के जमींदार हुआ करते थे। उन्होंने अपने नाम पर बर्डपुर कस्बा बसाने के साथ ही अपनी रियासत में आए गांवों को भी एक से 14 नम्बर तक बांट दिया था जो आज भी उसी नाम से जाना-पहचाना जाता है। बर्डपुर नम्बर से 14 के बीच बंटी उनकी रियासत 1947 में भारत के आजाद होने के बाद भी जस की तस स्थिति में बनी हुई है। जो नाम अंग्रेजी शासनकाल में राजस्व के कागजात में थे वह आज भी कायम हैं।
इस बार हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पहले सभी ग्राम पंचायतों का नए सिरे से परिसीमन करते हुए एक हजार की आबादी के हिसाब से बांट कर नई ग्राम पंचायतें बना दी गई लेकिन बर्डपुर की सभी चौदह ग्राम पंचायतों में किसी प्रकार का छेड़छाड़ नहीं हुआ। ऐसा क्यों किया गया इसे शासन व राजस्व परिषद ही बता सकता है। आज भी लोग वहां की ग्राम पंचायतों को बर्डपुर नम्बर एक से चौदह के बीच जानते व पहचानते ही नहीं बल्कि लिखा-पढ़ी में भी प्रयोग करते हैं। ऐसा भी नहीं है कि वहां की ग्राम पंचायत छोटी हैं इसलिए नए परिसीमन के दायरे में नहीं आईं। यहां की कोई भी ग्राम पंचायत ऐसी नहीं होगी जिसकी आबादी पांच हजार से कम हो।
बर्डपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत बर्डपुर नम्बर एक की आबादी 20 हजार से अधिक है। यहां पर वोटरों की तादाद भी 10 हजार से ऊपर है। इतनी बड़ी आबादी व इतने अधिक वोटर होने के बाद भी वह अपने पुराने वजूद पर कायम है।
पत्रिका इनपुट के साथ
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