योगी जी ताजमहल से इतनी ही नफरत है तो इसे मुसलमानों के हवाले क्यों नहीं कर देते हो
गंगा आरती को गंगा में नाव पर बैठ कर देखने का नज़ारा अद्भुद होता है , योगी जी को धन्यवाद कि उन्होंने इसे राज्य की पर्यटन सूची में पहला स्थान दिया। गोरखनाथ धाम भी देखने की चीज़ है , आखिरकार जहाँ आपका पुनर्जनम हुआ वह देखा ही जाना चाहिए। हाँ बदबूदार कूड़े और गंदगी के बीच उपस्थित इस मंदिर के आसपास साफ सफाई करा दीजिए और वहाँ घूम रहीं आवारा माताओं को कहीं और जगह दीजिए जिससे वह वहाँ गोबर ना कर सकें। आखिरकार पर्यटक आएँगे तो सफाई तो होनी ही चाहिए।
ताजमहल को सूची से हटाने का भी स्वागत है, क्योंकि ताजमहल जैसी धरोहर आपके पर्यटन सूची में रहना भी नहीं चाहिए, ताजमहल का एक अपना आस्तित्व है, जो भी भारत आता है वह आपकी पर्यटन सूची देख कर थोड़ी आता है, किसी भी पर्यटक का भारत आने का पहला उद्देश्य “ताजमहल” देखना ही होता है।
ताजमहल विदेशों में भारत का “प्रतीक” है, अंबेसडर है। ताजमहल दुनिया के सात अजूबों में पहले नंबर पर है। उसे अपनी पहचान बताने के लिए किसी कुंठित सोच के सरकार की किसी पर्यटक पुस्तिका की ज़रूरत ही नहीं। भारत में पर्यटन के नाम से हुई विदेशी आय का 100% हिस्सा केवल और केवल ताजमहल का है। माफ कीजिएगा, आपकी सूची तो कोई पढ़ता भी नहीं होगा, ताजमहल अपने आप में दुनिया की किसी भी सूची से बड़ा है, इस सूची में रहकर वह छोटा ही लग रहा था।
योगी जी धन्यवाद
दरअसल ऐसी कुंठा सदैव सामने आती रहेगी, भारत में पर्यटकों के देखने लायक जो भी है उसे या तो अंग्रेज़ों ने अपने 200 साल के कार्यकाल में बनवाया या फिर उसके पहले मुसलमानों ने 600 साल के अपने कार्यकाल में बनवाया।
अंग्रेज़ तो सगे ही थे तो उनकी बनाई सभी चीज़ों से गर्व ही महसूस होता होगा, इस काल के बाद फिर वही मुसलमानों का काल बचता है जिसमें एक से एक धरोहर बनाई गयी, जिसकी गवाही ताजमहल सीना तानकर आजतक दे रहा है। एक पूरा शहर ताजमहल के रहमों करम पर अपना पेट पाल रहा है।
दरअसल योगी के पास अधिक विकल्प भी नहीं, क्योंकि इन दोनों कालों के बाद उनको नग्न और अश्लील कामोत्तोजित आसन वाली मुर्तियों से भरी “अजंता एलोरा” जैसी इमारतें ही दिखाने को मिलेंगी जिसे स्वच्छ पारिवारिक समूह के साथ देखा नहीं जा सकता या फिर मिलेंगी नग्न “खजुराहो”।
खैर, योगी जी, आपके एक एक निर्णय आपके पक्षपाती होने का इतिहास लिख रहे हैं, आप ऐसे ही करते जाइए। आपका स्वागत है, बेहतर तो यह होता कि मुगलों समेत मुसलमानों की बनवाई सारी इमारतों और धरोहरों को उनके ही सुपुर्द कर दें। राज्य और देश का बहुत बड़ा राजस्व बच जाएगा।
मोहम्मद जाहिद (लेखक सोशल मीडिया एक्टिविस्ट हैं ये उनके निजी विचार हैं)
