तीन तलाक पर बिल का मक़सद मुस्लिम समाज को नष्ट करना और जेलों को मुस्लिम पुरुषों से भरना है
उन्होंने राज्यसभा के सदस्यों से मांग की है के वह मौजूदा बिल को पारित न होने दें और सलेकेट समिति के पास भेजने की मांग करें क्यों कि शादी एक सिविल अनुबंध है और वह अपने तंत्र से ही समाधान होगा न कि आपराधिक अधिनियम से। उन्होंने कहा कि बोर्ड ने बिल ड्राफ्ट पढ़ा है और पढ़ कर हैरान रह गए कि यह कैसे बिल ड्राफ्ट किया गया है जो क्रिमनल एक्ट रखा गया है। उन्होंने कहा कि हैरानी की बात यह है कि इस बिल के तहत पत्नी के बजाय महल्ले का कोई व्यक्ति दुश्मनी में भी तीन तलाक की शिकायत करता है तो पुलिस को कार्रवाई करने का अधिकार होगा।
उन्होंने इस बिल को मजाक बताते हुए इसे न्याय का अपमान करार दिया है और कहा कि कानून मंत्री मुस्लिम देशों का उदाहरण दे रहे हैं और उन्होंने बिल पर उठने ऑब्जेक्ट कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि कानून मंत्री मुस्लिम देशों की मिसाल पेश करते नहीं थक रहे थे जबकि मुस्लिम देशों में तीन तलाक पज़ीरिय अपराध नहीं उन्होंने दावा किया कि कानून मंत्री ने मुस्लिम देशों का नाम लेकर संसद और जनता को धोखा देने का काम किया है ।