मुसलमान नोजवानों पर लगे मुकदमें वापस लेगी कर्नाटक सरकार-बीजेपी ने जताया विरोध
कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया की सरकार ने सर्कुलर जारी कर राज्य में अल्पसंख्यक, किसानों और कन्नड़ आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज किए गए केस वापस लेने की बात कही है. बीजेपी ने कांग्रेस सरकार के इस फैसले पर निशाना साधते हुए इसे चुनाव के पहले अल्पसंख्यकों को रिझाने की कोशिश करार दिया है.
दरअसल कर्नाटक सरकार ने राज्य के 189 मुस्लिम युवाओं पर लगे केस वापस लेने का फैसला किया है. कर्नाटक के डीजीपी और आईजी नीलमणि राजू की तरफ से एआईजीपी(जनरल) शिव प्रकाश देवराज ने 25 जनवरी को राज्य के सभी जिलों के उच्च पुलिस अधिकारियों के लिए एक पत्र जारी किया. इस पत्र के मुताबिक सरकार ने सभी पुलिस स्टेशनों से अपने उस पत्र के संदर्भ में जवाब देने को कहा है कि जिसमें अल्पसंख्यकों पर लगे केस वापस लेने के बारे में कहा गया था।
पत्र का विषय था, ‘सांप्रदायिक हिंसा के मामलों में निर्दोष अल्पसंख्यकों के खिलाफ चलाए जा रहे मामलों को वापस लेने के संदर्भ में’. इस पत्र में लिखा था है कि पिछले दो पत्रों का संदर्भ लेते हुए आपसे अनुरोध है कि पिछले पांच सालों के दौरान राज्य के पुलिस स्टेशनों में अल्पसंख्यकों पर लगे केस खिलाफ वापस लेने के बारे में आप अपना जवाब आवश्यक दस्तावेजों के साथ विभाग को भेजे.’
बीजेपी नेता अमन सिन्हा ने कहा है, ‘कांग्रेस का यह कदम अप्रैल-मई में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए उठाया गया कदम है. यह सर्कुलर पूरी तरह से गैरकानूनी है. कांग्रेस ने मुस्लिम तुष्टिकरण के जरिए वोट लेने की कोशिश में है. ‘
बिहार में बीजेपी के साथ गठबंधन वाली जेडीयू के प्रवक्ता अफजल अब्बास ने कहा कि अच्छी बात है कि आप बेगुनाहों को कैद से मुक्त करने की बात कर रहे हैं या यह कहने कि आप बेगुनाहों को गुनहगार होने से रोकना चाहते हैं लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह बात आपको सिर्फ चुनाव के समय ही याद आई इससे पहले आपने क्यों ऐसा नहीं किया क्यों क्या यह क्यों ना कहा जाए कि आप तुष्टिकरण की राजनीति करना चाहते हैं लोग आज इस कदर ऐसे हो गए हैं कि तमाम मुद्दों का राजनीतिकरण कर रहे हैं और यह भी कर्नाटक में जो मुख्यमंत्री कर रहे हैं वह सब कुछ राजनीति से प्रेरित है.
