तीन तलाक़ के खिलाफ लड़ने वाली इशरत जहां का पर्दा फाश। गोदी मीडिया ने सच को छुपाया,पति ने नहीं दिया था तलाक़
मार्च 2014 में वे खुद घर पर चार बच्चों को छोड़ कर अपने मायके से फरार हो गईं थी, इसके बाद पंचायत, थाना और सभी लोगों के कहने के बावजूद वह पति के पास नहीं लौटी और अपने प्रेमी के साथ ज्यादातर रहती है.इशरत जहां घर बिहार के जिला नवादा में स्थित पकरी ब्रावां गांव में है।
उसके पिता का नाम हसीब अख्तर जो टेलर मास्टर हैं, 2002 में औरंगाबाद बिहार से संबंधित मोहम्मद मुर्तजा अंसारी से इशरत जहां की शादी हुई थी. मुर्तजा अंसारी ने सोशल मीडिया के एक न्यूज पोर्टल मिल्लत टाइम्स को दिये गए एक इंटरव्यू में बताया कि हम दोनों से चार बच्चे हुए जिनमें तीन बेटी और एक बेटा हैे।
शादी के बाद मैं उसके रहने के लिए एक आवास की व्यवस्था कोलकता में किया और वह खुद दुबई रोजगार के लिए चला गया, मेरे भाई मुस्तफा अंसारी भी वहीं रहते हैं। मामला 2009 तक सही रहा, उसके बाद वह भागना शुरू कर दिया, तीन बार कोलकाता से बच्चों को छोड़कर भाग गई।
सके बाद हम इसके लिए आवास की व्यवस्था गांव में कर दिया, गांव में वह अकेले मेरे चारबचों के साथ थीं, मेरे माता पिता का निधन हो चुका है. मारच 2014 में एक दिन एक पड़ोसी के मोबाइल से मेरी बड़ी बेटी शाइशता ने मिस कॉल दिया जिसके बाद फोन से बातचीत हुई तो पता चला कि मेरी पत्नी इशरत जहां सुबह 4 बजे चारों बच्चों को घर पर छोड़कर भाग गई हैं।
फिर मैं अपने ससुराल संपर्क किया लेकिन किसी ने मेरी कोई बात नहीं सुनी, इशरत जहां से में घरलोटने को कहा तो जाने पर आमादा नहीं हुई, उसके बाद मेरे मोहल्ले की एक विधवा महिला से मैं अनुरोध किया कि वह मेरे बच्चों की परवरिश करे।
14 महीने के बाद दुबई से जब घर आया तो मैंने एक बार फिर संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उसने कोई ध्यान नहीं दिया, पंचायत और थाने में भी मैं बात रखी, इशरत जहां को बुलाकर कहा गया कि तुम्हारा पति तुम्हें रखने के लिए तैयार है जाओ अपना घर बसाऊ लेकिन उसने इनकार किया।
उसके पिता का नाम हसीब अख्तर जो टेलर मास्टर हैं, 2002 में औरंगाबाद बिहार से संबंधित मोहम्मद मुर्तजा अंसारी से इशरत जहां की शादी हुई थी. मुर्तजा अंसारी ने सोशल मीडिया के एक न्यूज पोर्टल मिल्लत टाइम्स को दिये गए एक इंटरव्यू में बताया कि हम दोनों से चार बच्चे हुए जिनमें तीन बेटी और एक बेटा हैे।
शादी के बाद मैं उसके रहने के लिए एक आवास की व्यवस्था कोलकता में किया और वह खुद दुबई रोजगार के लिए चला गया, मेरे भाई मुस्तफा अंसारी भी वहीं रहते हैं। मामला 2009 तक सही रहा, उसके बाद वह भागना शुरू कर दिया, तीन बार कोलकाता से बच्चों को छोड़कर भाग गई।
सके बाद हम इसके लिए आवास की व्यवस्था गांव में कर दिया, गांव में वह अकेले मेरे चारबचों के साथ थीं, मेरे माता पिता का निधन हो चुका है. मारच 2014 में एक दिन एक पड़ोसी के मोबाइल से मेरी बड़ी बेटी शाइशता ने मिस कॉल दिया जिसके बाद फोन से बातचीत हुई तो पता चला कि मेरी पत्नी इशरत जहां सुबह 4 बजे चारों बच्चों को घर पर छोड़कर भाग गई हैं।
फिर मैं अपने ससुराल संपर्क किया लेकिन किसी ने मेरी कोई बात नहीं सुनी, इशरत जहां से में घरलोटने को कहा तो जाने पर आमादा नहीं हुई, उसके बाद मेरे मोहल्ले की एक विधवा महिला से मैं अनुरोध किया कि वह मेरे बच्चों की परवरिश करे।
14 महीने के बाद दुबई से जब घर आया तो मैंने एक बार फिर संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उसने कोई ध्यान नहीं दिया, पंचायत और थाने में भी मैं बात रखी, इशरत जहां को बुलाकर कहा गया कि तुम्हारा पति तुम्हें रखने के लिए तैयार है जाओ अपना घर बसाऊ लेकिन उसने इनकार किया।
