कुएं से मिले टीपू सुल्तान के 100 से ज्यादा रॉकेट, विशेषज्ञ बोले – आज की तकनीक भी है फ़ैल
उन्होंने बताया, ‘रॉकेट लगातार पानी की तलहटी में पड़े रहने के कारण जीर्ण-शीर्ण हाल में थे. उनमें काला पाउडर भरा हुआ था. यह पाउडर सल्फ़र, चारकोल और पोटेशियम नाइट्रेट का मिश्रण है. इनका विशेषज्ञों की एक टीम ने अध्ययन किया. इन सभी 100 रॉकेटों का इस्तेमाल लगभग 700 साल तक लड़ाइयों में किया गया है. इन रॉकेट का हैदर अली द्वारा लड़ी गई लड़ाइयों भी इस्तेमाल किया गया.1799 में टीपू सुल्तान के पतन के बाद अलग-अलग तरह की 100 से ज्यादा रॉकेटों को ब्रिटिशर्स ने अपने कब्जे में ले लिया था. इसके बाद 1804 में ब्रिटिशर्स ने मैसूर रॉकेटों की तर्ज पर दूसरे रॉकेटों का आविष्कार किया. खोज के दौरान मिली रॉकेटों को इस साल मार्च अप्रैल तक सार्वजनिक प्रदर्शनी के लिए लगाया जाएगा.
