मदरसे को आतंकवाद से जोडना शर्मनाक है- देश के पहले शिक्षा मंत्री ने भी मदरसे में ही की थी पढ़ाई
जिसने ब्रिटिश की गुलामी को कभी क़ुबूल नहीं किया। गांधी जी के साथ मौलाना अबुल कलाम आजाद और मौलाना हसरत मोहानी जैसे लोग साथ थे उनका संबंध भी मदरसों से था।मदरसे के पढ़े लोग हैं प्रोफेसर.मौलाना ने कहा- मदरसे की तालीम लेकर मौलाना प्रोफेसर बदरुल हसन जैसी शख्सियत निकली जिन्होंने बीएचयू में फारसी विभाग को बुलंदियों तक पहुंचाया।
मदरसों ने मोहम्मद जहीर और मुख्तार मोहसिन जैसे पीसीएस इस कौम को दिए। मौजूदा वक्त में मदरसों से शिक्षा लेने वाले प्रोफेसर नय्यर जलालपुरी लखनऊ यूनिवर्सिटी, जामिया मिल्लिया में असिस्टेंट प्रोफेसर सैय्यद कलीम असगर, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में असगर एजाज कायमी.
हुसैनाबाद इण्टर कॉलेज में डॉ मिर्जा शफीक हुसैन शफक, संभल कॉलेज में असगर हैदरी साहब के अलावा न जाने कितने लोग इस मुल्क का नाम रोशन कर रहे हैं जो मदरसों से पढ़े हैं।मदरसे के स्टूडेंट देश के नामी यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे हैं और देश का नाम रोशन कर रहे हैं.
बोर्ड के लिए रिजवी ने क्या किया
उन्होंने कहा, वसीम रिजवी बताएं कि इतने सालों में उन्होंने वफ्क बोर्ड के लिए क्या किया है। अपनी कुर्सी के लिए जिन्होंने कभी आजम खान को बड़ा माना, वो अब योगी जी के चरण स्पर्श कर रहे हैं। वो यह सोचते हैं कि इससे वह बीजेपी में अपनी जगह बना लेंगे। आरएसएस बहुत अच्छी तरह जानता है कि जो आज कुर्सी के लिए अपनी कौम पर बयानबाजी कर रहा है। वह कल अपनी कुर्सी के लिए आरएसएस पर भी बयानबाजी करेगा.
कौन हैं मौलाना अदीब हसन रिजवी जैद्पूरी
मौलाना अदीब हसन रिजवी जैदपुरी बाराबंकी के रहने वाले हैं। उन्होंने ईरान में मौलाना की पढ़ाई पढ़ी है और इस वक्त फारसी से जेएनयू में पीएचडी कर रहे हैं.
लेटर में रिजवी ने क्या लिखा था ?
यूपी शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के प्रेसिडेंट वसीम रिजवी ने प्रधानमंत्री और यूपी के चीफ मिनिस्टर को एक खत लिखा। उन्होंने लिखा, “आतंकी संगठन अवैध रूप से चल रहे कुछ मदरसों की फंडिंग करते हैं। कितने मदरसों ने डॉक्टर-इंजीनियर दिए। इन्हें खत्म करने की जरूरत है.
