‘मुस्लिमों की आबादी पर बीजेपी नेता बोल रहे सिर्फ कोरा झूठ’
हाल ही में राजस्थान से बीजेपी विधायक बी एल सिंघल ने विवादास्पद बयान देते हुए कहा, हिन्दू दम्पति एक या दो संतान पैदा कर रहे हैं, जबकि मुस्लिम दम्पति 8 से 14 बच्चे तक पैदा कर रहे हैं। कई बार तो मुस्लिम दम्पति संतान पैदा करने के लिए महिलाओं को खरीदकर लाते हैं और बच्चे पैदा करते हैं. जिस तीव्र गति से मुस्लिम आबादी बढ़ रही है, इससे आने वाले वर्षों में हिंदुओं का अस्तित्व खतरे में आ जायेगा. उन्होंने कहा कि मुस्लिम आबादी अधिक होने पर ज्यादा से ज्यादा राज्यों में मुख्यमंत्री, देश का प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति मुस्लिम होंगे. इसके बाद मुस्लिमों के द्वारा इस तरह के कानून बनाये जाएंगे कि हिंदुओं का अस्तित्व खतरे में आ जायेगा. मुसलमान हिंदुओं को जेल में ठूंस देंगे और हिंदुओं के संसाधनों का खुद इस्तेमाल करेंगे.
इसी के साथ केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह कहा है कि मुस्लिमों की बढ़ी आबादी देश के लिए खतरा हो सकती है. गिरिराज ने कहा, ‘देश के अंदर बढ़ती हुई जनसंख्या और खासकर मुसलमानों की बढ़ती जनसंख्या सामाजिक समरसता के लिए तो खतरा है ही लेकिन विकास के लिए भी खतरा है. जहां-जहां हिंदुओं की जनसंख्या गिरी है वहां-वहां सामाजिक समरसता टूटी है, चाहे केरल का मल्लापुरम हो, चाहे बिहार का किशनगंज हो, चाहे उत्तर प्रदेश हो, चाहे कैराना हो, चाहे बिहार का रानीसागर हो, भोजपुर जिला हो. कई हजार उदाहरण हैं इसके. विकास और सामाजिक समरसता के लिए यह अच्छा सूचक नहीं है, इसलिए इस पर बहस होनी चाहिए और कानून बनना चाहिए.
बीजेपी नेताओं के इन आधारहीन बयानों की पोल जनसँख्या के आकडे खोल रहे है. ये आकडे बता रहे है कि हिन्दुओ की तुलना में मुस्लिमों की जनसँख्या वृद्धि दर बहुत कम है. जबकि ऐसी स्थिति में हिन्दू देश में बहुसंख्यक है. आकड़ों के अनुसार, मुस्लिम जनसंख्या वृद्धि 20 साल के निम्नतम स्तर पर है.
उपलब्ध डेटा के विश्लेषण के अनुसार, 2050 तक भारत में मुस्लिमों की जनसँख्या 18.4% से अधिक नहीं होगी. ध्यान रहे 2011 में भारत में मुस्लिमों की संख्या का प्रतिशत 14.4% था. आकड़ों के मुताबिक़, इस दौरान हिन्दुओं की जनसँख्या वृद्धि इतनी ज्यादा होंगी कि चार भारतीयों में से तीन हिंदू होंगे.
2001 से 2011 की जनसंख्या के मुताबिक, भारत में मुस्लिमों के अनुपात 13.4% से बढ़कर 14.4% हुआ. इसके बावजूद, 2011 में मुस्लिम आबादी में 20 साल की कमी दर्ज की गई, जो 1991 में 32.8% से घटकर 24.6% हो गई. ऐसे में अगले 32 सालों में मुसलमानों के अनुपात में 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी से ज्यादा की सम्भावना नहीं है.
