तीन तलाक बिल के खिलाफ जयपुर में उमड़ा मुसलमानों का सैलाब- गुलाम रसूल बलयावी ने बोला मोदी सरकार पर हमला
बलयावी ने कहाकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चुनाव भ्रष्टाचार, घोटालों और आतंकवाद के विरुद्ध जीता था लेकिन वह इन मुद्दों पर काम नहीं कर रहे। उन्होंने कहाकि यह देश एक व्यक्ति की मर्ज़ी से नहीं चलेगा और गोडसे की नहीं बल्कि गांधी की विरासत पर चलेगा। पूर्व सांसद ने प्रधानमंत्री पर आरोप लगाया कि वह अपना वैवाहिक संबंध नहीं निभा पाए तो ऐसे में मुस्लिम बेटियों के तलाक़ के मसले पर उनका पीड़ा व्यक्त करना महज़ दिखावा है। मौलाना बलयावी ने कहाकि वह बिहार के रहने वाले हैं और बंगाल, बिहार और झारखंड में एक आंदोलन शुरू कर चुके हैं कि जब निकाह सबके सामने हो तो तलाक़ लेने वाले जोड़ों को भी आगाह किया जा रहा है कि तलाक़ से बचें लेकिन आवश्यक हो तो निकाह की तरह उलेमा की मौजूदगी में शरीअत के मुताबिक़ खुले में तलाक़ लें। फिर भी कोई ज़बरदस्ती तीन तलाक़ दे रहा है तो वह उस पुरुष के सामाजिक बायकॉट की अपील कर रहे हैं। राजस्थान के मुस्लिम भी पत्नी को एकतरफ़ा एक सभा में तीन तलाक़ देने वाले पुरुष का बायकॉट शुरू करें।
सरकार हमें डराने की कोशिश ना करे- मुफ़्ती अशफ़ाक़ हुसैन
भारत में सूफ़ी उलेमा के सबसे बड़े संगठन ऑल इंडिया तंज़ीम उलामा ए इस्लाम के संस्थापक अध्यक्ष मुफ़्ती अशफ़ाक़ हुसैन क़ादरी ने कहाकि सरकार मुसलमानों को डराने की कोशिश ना करे। उन्होंने कहाकि हिन्दुत्व की प्रयोगशाला में तैयार कर रहे हिंसक लोगों पर रोकथाम नहीं लगाई गई तो हमारा हश्र भी पाकिस्तान जैसा हो जाएगा। मुफ़्ती अशफ़ाक़ हुसैन ने कहाकि तलाक़ से महिला का सामाजिक जीवन ख़तरे में पड़ जाता है और इस पर रोकथाम ज़रूरी है लेकिन जिस तरह सरकार तीन तलाक़ देने पर पुरुष को जेल भेजना चाहती है, उसी प्रकार बिना किसी सूचना और तलाक़ के अपनी पत्नी को छोड़कर जाने वाले को भी जेल होनी चाहिए।
क़ानून में विचित्र ख़ामियां मौजूद हैं- हबीब ख़ान गौराण
राजस्थान कर्मचारी चयन आयोग के पूर्व अध्यक्ष हबीब ख़ान गौराण ने कहाकि संसद में प्रस्तावित मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकार की सुरक्षा) बिल में कई क़ानूनी ख़ामियाँ हैं। उन्होंने कहाकि यह बिल मानता है कि एक बार में दी गई तीन तलाक़ मान्य नहीं होगी तो इस कथित अपराध के लिए महिला के पति को तीन साल के लिए कैसे जेल भेजा जा सकता है? गौराण ने कहाकि जो अपराध ही नहीं हुआ, उसकी सज़ा कैसे दी जा सकती है? विवाह और तलाक़ एक सिविल मसला है जिसे केन्द्र सरकार फौजदारी बना रही है। इस क़ानून के पीछे सरकार की मंशा मुस्लिम परिवारों को संकट में धकेलना, अकेली महिला के भरण पोषण के लिए भटकाना और संतान के लिए संकट पैदा करने वाला है।
युवा सुधार अभियान चलाएंगे- मुफ़्ती ख़ालिद अय्यूब मिस्बाही
आयोजक और पत्रिका अहसास के संपादक ख़ालिद अय्यूब मिस्बाही ने कहाकि अधिकांश तलाक़ नशे की हालत में होती है। मिस्बाही ने कहाकि उनकी मैगज़ीन में इसपर ना सिर्फ़ विशेष सिरीज़ चलाई जाएगी बल्कि युवाओं के लिए नशामुक्ति अभियान भी चलाया जाएगा। उन्होंने कहाकि वह महिला आलिमों को प्रशिक्षण देंगे ताकि वह अधिक से अधिक युवा महिलाओं की रहनुमाई कर उन्हें शरीअत में प्रदत्त शक्तियों के बारे में बता सकें। उन्होंने मौजूदा क़ानून को बेकार बताते हुए इसे दुर्भावनापूर्ण और ग़ैर इस्लामी बताया। उन्होंने कहाकि तलाक़ के बाद अकसर जोड़ों को अपनी ग़लती का अहसास होता है और वह फिर साथ रहना चाहते हैं। इस क़ानून के बाद इसकी संभावनाएं समाप्त हो जाएंगी।
