दुनिया मुसलमानों को आपस में लड़ाकर तबाह करना चाहती है: तय्यब एर्दोगान
तुर्की के राष्ट्रपति ने इस्लामिक दुनिया को सतर्क रहने और दूर तक देखने की क्षमता पैदा करने पर ज़ोर देते हुए कहा है कि, दुनिया इस्लामी दुनिया की ऐकता और समृद्धि को नष्ट करने तथा महत्वपूर्ण भविष्य को नष्ट करने के लिए पूरा खेल खेला जारहा है।मुस्लिम समाज को नष्ट करने का उद्देश्य मुसलमानों की छोटे छोटे टुकड़ों में बाँट कर उनमें जातीय और नस्लीय तथा फ़िरक़ा परस्ती को बढ़ावा देकर उनको उनके आंतरिक मामलों में उलझाये रखना है।
जिसके द्वारा मुसलमान आपस मे लड़ते रहेंगे और उनमें आंतरिक अंतर बना रहेगाह। दुनिया चाहती है कि मुसलमान आपस में एक दूसरे से इतनी नफरत करने लगे कि उन्हें अपना पड़ोसी और भाई भी अच्छा ना लगे,बल्कि सब एक दुसरे की जान में दुश्मन बन जाएँ ।और सच्ची बात तो यह है कि यूरोप अपने इतिहास की सारी गलतियाँ इस्लाम और मुसलमान के सर डाल कर खुद अपना भविष्य सुरक्षित करना चाहता है।
ग्लोबल सिस्टम जो प्रथम विश्व युद्ध के बाद अस्तित्व में आया और द्वितीय विश्व युद्ध के साथ जुड़ा हुआ था, आज न्याय और आजादी के लिए सबसे बड़ी बाधा बन गया है। राष्ट्रपति ईरदवान ने कहा: “शाम में सात साल से जारी अत्याचार और क़त्लेआम पर जो उदासीनता दिखाई गई।
सीमा पर जो शरणार्थियों के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया और म्यंमार के अरकान के नरसंहार पर जो खामोशी छाई हुई है उसने पश्चिम का आज असली चेहरा दुनिया के सामने साफ दिखा दिया है।यूरोप में इस्लामोफोबिया, न्यू नाजीइज़्म और जातिवाद बड़ी तेजी से बढ़ रहा है।जिसके कारण लोकतांत्रिक मर्यादा खत्म होती जारही हैं।
जिसके द्वारा मुसलमान आपस मे लड़ते रहेंगे और उनमें आंतरिक अंतर बना रहेगाह। दुनिया चाहती है कि मुसलमान आपस में एक दूसरे से इतनी नफरत करने लगे कि उन्हें अपना पड़ोसी और भाई भी अच्छा ना लगे,बल्कि सब एक दुसरे की जान में दुश्मन बन जाएँ ।और सच्ची बात तो यह है कि यूरोप अपने इतिहास की सारी गलतियाँ इस्लाम और मुसलमान के सर डाल कर खुद अपना भविष्य सुरक्षित करना चाहता है।
ग्लोबल सिस्टम जो प्रथम विश्व युद्ध के बाद अस्तित्व में आया और द्वितीय विश्व युद्ध के साथ जुड़ा हुआ था, आज न्याय और आजादी के लिए सबसे बड़ी बाधा बन गया है। राष्ट्रपति ईरदवान ने कहा: “शाम में सात साल से जारी अत्याचार और क़त्लेआम पर जो उदासीनता दिखाई गई।
सीमा पर जो शरणार्थियों के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया और म्यंमार के अरकान के नरसंहार पर जो खामोशी छाई हुई है उसने पश्चिम का आज असली चेहरा दुनिया के सामने साफ दिखा दिया है।यूरोप में इस्लामोफोबिया, न्यू नाजीइज़्म और जातिवाद बड़ी तेजी से बढ़ रहा है।जिसके कारण लोकतांत्रिक मर्यादा खत्म होती जारही हैं।
