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यह मुसलमान और इस्लाम को लेकर वही भाषा बोलेंगे जो संघी बोलते है






भारत में दक्षिण और वामपंथी अर्थात संघी और कम्युनिस्ट की सोच मुसलमानों और इस्लाम को लेकर लगभग एक जैसी ही है। इसीलिए इनके लिखे इतिहास मुस्लिम शासकों को एक जैसे खलनायक दिखाते मिलेंगे।
सिकंदर युद्ध जीता तो महान और मुस्लिम बादशाह युद्ध जीते तो आक्रमणकारी।

वामपंथी यदि हिन्दु नाम का है तो उसका धर्म विरोध केवल और केवल इस्लाम से है और संघियों का तो जन्म ही मुसलमानों के विरोध के कारण हुआ है।

वामपंथियों के संघ विरोध और कन्हैया , खालिद उमर और शहला रशीद के लच्छेदार संघ और भाजपा विरोध के भाषण पर खुश होकर ताली बजाने से अधिक आवश्यकता इनसे सावधान रहने की है। यह कभी भी अपना असली रूप दिखा सकते हैं।

खालिद उमर का अपने मुसलमान होने पर दिया गया बयान और कल शहला रशीद के बयान को ध्यान में रखिएगा तो आपको मेरी बात सच लगेगी , ऐसे ही “बाटला हाऊस” के एक मुशायरे में आए कन्हैया ने “अल्लाह” के बारे में भी मेरी आखों के सामने आपत्ती जनक बातें कहीं।

यह इनके दिल से स्वतः निकली बातें होती हैं।
अपनी राजनीति चमकाने के लिए यह भाजपा और संघ विरोध तो करेंगे परन्तु जैसे ही बात आईडियोलाजी की आएगी यह मुसलमान और इस्लाम को लेकर वही भाषा बोलेंगे जो संघी बोलते हैं।

इस मामले में दोनों एक ही थैली के चट्टे बट्टे हैं।
शहला रशीद इस पिच की नयी नयी खिलाड़ी हैं , जिनको आम मुसलमान , मुसलमान मान कर भाव देता रहा है जबकि वह एक कम्युनिस्ट है। और उनका हालिया ताज़ा बयान वैसा ही है जैसे साध्वी , योगी या प्राची देते रहते हैं।

हैरत की बात यह है कि किसी मौलाना के दिए मशवरे को “फतवा” “फतवा” कह कर आसमान उठा लेने वाली मीडिया अपने सेलेक्टिव सोच के कारण इसे “फतवा” नहीं मानती।
शहला रशीद ने दो दिन पहले कहा कि “मुस्लिम लड़कियों को गैर मुस्लिम लड़कों से शादी करनी चाहिए”

“शहला रशीद शोरा” काश्मीरी मुस्लिम माता पिता की औलाद हैं तो उनको उनके माँ बाप ने यह सिखाया होगा कि इस्लाम में गैर मुस्लिमों से विवाह की इजाज़त नहीं है , इसे हराम करार दिया गया है। और इस्लाम में ही क्युं हर धर्म में अपने धर्म के लोगों से ही विवाह को कहा गया है बल्कि और धर्म में तो जाति , गोत्र , कुल इत्यादि की भी बाध्यता है।

शहला रशीद को इस्लाम का यह मूल सिद्धान्त उनके काश्मीरी मुस्लिम माता पिता ने अवश्य बताया होगा परन्तु जेएनयू के वामपंथी वातावरण में लगता है कि वह सब भूल गयीं।

शहला रशीद ने सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम हज़रत मुहम्मद के बारे में भी बेहद घटिया बातें की थीं जिसके विरुद्ध अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी स्टूडेन्ट यूनियन की सदस्य गज़ाला अहमद ने 9 जनवरी 2017 को एफआईआर दर्ज कराई है।

शहला रशीद के पिता का नाम संभवतः “रशीद शोरा” ही होगा और माता भी संभवतः मुस्लिम ही हैं जो श्रीनगर में एक नर्स हैं , उनको अपनी माता से यह बात पूछनी थी कि उन्होंने एक मुस्लिम पुरूष से ही विवाह क्युं किया तो शायद उनको इसका जवाब मिल जाता।

भारतीय संविधान हर किसी को यह स्वतंत्रता देता है कि वह अपनी मर्ज़ी से अपना जीवन साथी चुने तो शहला रशीद किसी के व्यक्तिगत जीवन में दखल देने वाली होती कौन हैं ?
और जब दखल दे ही दिया है तो एक सच यह भी है कि शहला रशीद के ब्वाय फ्रैन्ड का नाम “अकबर” है जो संभवतः मुसलमान ही है।

अब ऐसे लोगों का भरोसा भी नहीं , आज कोई दूसरा भी हो सकता है। शहला रशीद किसी से कुछ भी करें वह उनकी स्वतंत्रता है , एक से करें दो से करें या पंचाली बन जाएं किसी को क्या आपत्ती है परन्तु इस्लामिक सिद्धान्त के खिलाफ जाकर वह दूसरों को नसीहत देने का वह अधिकार नहीं रखतीं।
( ये लेखक के निजी विचार हैं)




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