धर्म के नाम पर खून बहाने वाले हो जाए सावधान, सुप्रीम कोर्ट ने दी ये चेतावनी
क्या है मामला ?
महाराष्ट्र के पुणे में 2 जून 2014 की रात्री को नमाज़ पढ़कर वापस घर लौट रहे मोहसिन शेख को तीन हिन्दुत्ववादी संगठन के गुंडों ने पीट-पीट कर हत्या कर दी थी। जिसमे मामले की सुनाई कर रहे हाई कोर्ट ने तीन आरोपियों विजय गंभीर, गणेश यादव और अजय लागले इसी साल 12 जनवरी को ज़मानत दे दी थी।
तीनों कथित तौर पर हिंदू राष्ट्र सेना से जुड़े हुए थे तथा रात्री में हॉकी डंडे लेकर घूम रहे थे वहीँ मस्जिद से वापस आ रहे मोहसिन शेख की पीट-पीट कर हत्या कर दी थी। हालाँकि निचली अदालत ने तीनों की ज़मानत अर्जी ख़ारिज कर दी थी लेकिन मामला जब हाई कोर्ट पहुंचा तब उन्हें वहां से ज़मानत मिल गयी तथा हाई कोर्ट ने कहा था की ‘तीनों की ऐसा करने की कोई पहले से मंशा नहीं थी और न ही उनकी मोहसीन से कोई दुश्मनी थी। मोहसीन का गुनाह सिर्फ यह था कि वह दूसरे धर्म से था। हमें लगता है कि यह बात आरोपियों के पक्ष में जाती है।’ हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि तीनों का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था और तीनों ने धर्म के नाम पर उकसावे में आकर ऐसा किया था।
वहीँ सुप्रीम कोर्ट ने चेतवानी देते हुए कहा की ऐसी टिप्पणी करने से बचे क्यों की भारत बहुलतावादी देश है, इस तरह की टिप्पणी से अपराधियों के हौसले बढ़ सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने तीनों की ज़मानत ख़ारिज करते हुए हाई कोर्ट से पुन: विचार करने को कहा है। शायद सर्वोच्च अदालत ने सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की है जिसमे हाई कोर्ट का कहना की “उनकी मोहसिन शेख की हत्या करने की मंशा ना होना” जैसी टिप्पणी भी शामिल है क्यों की अपराधियों के पास रात्री में लाठी-डंडों और हॉकी का होना दर्शाता है की वो किसी अपराध को अंजाम देने की मंशा से ही निकले थे।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने हो सकता है कि अपराध के पीछे अभियुक्तों का निजी दुश्मनी न होना, बल्कि धार्मिक नफरत होने की बात दर्ज करते हुए ये कहा हो। जज का किसी समुदाय की भावनाएं आहत करने का इरादा नहीं होगा, लेकिन टिप्पणी आलोचनाओं को बल देती है।
इससे पहले साल 2014 में मोहसिन शेख की पुणे में हिंदू राष्ट्र सेना के सदस्यों द्वारा कथित तौर पर हत्या के मामले 3 आरोपियों की जमानत रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया था।
हत्या के तीन आरोपी विजय राजेंद्र गंभीर, गणेश उर्फ रंजीत शंकर यादव और अजीत दिलीप लागले को अदालत ने जमानत दे दी थी। मोहसिन के परिवार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
तीनों कथित तौर पर हिंदू राष्ट्र सेना से जुड़े हुए थे तथा रात्री में हॉकी डंडे लेकर घूम रहे थे वहीँ मस्जिद से वापस आ रहे मोहसिन शेख की पीट-पीट कर हत्या कर दी थी। हालाँकि निचली अदालत ने तीनों की ज़मानत अर्जी ख़ारिज कर दी थी लेकिन मामला जब हाई कोर्ट पहुंचा तब उन्हें वहां से ज़मानत मिल गयी तथा हाई कोर्ट ने कहा था की ‘तीनों की ऐसा करने की कोई पहले से मंशा नहीं थी और न ही उनकी मोहसीन से कोई दुश्मनी थी। मोहसीन का गुनाह सिर्फ यह था कि वह दूसरे धर्म से था। हमें लगता है कि यह बात आरोपियों के पक्ष में जाती है।’ हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि तीनों का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था और तीनों ने धर्म के नाम पर उकसावे में आकर ऐसा किया था।
वहीँ सुप्रीम कोर्ट ने चेतवानी देते हुए कहा की ऐसी टिप्पणी करने से बचे क्यों की भारत बहुलतावादी देश है, इस तरह की टिप्पणी से अपराधियों के हौसले बढ़ सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने तीनों की ज़मानत ख़ारिज करते हुए हाई कोर्ट से पुन: विचार करने को कहा है। शायद सर्वोच्च अदालत ने सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की है जिसमे हाई कोर्ट का कहना की “उनकी मोहसिन शेख की हत्या करने की मंशा ना होना” जैसी टिप्पणी भी शामिल है क्यों की अपराधियों के पास रात्री में लाठी-डंडों और हॉकी का होना दर्शाता है की वो किसी अपराध को अंजाम देने की मंशा से ही निकले थे।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने हो सकता है कि अपराध के पीछे अभियुक्तों का निजी दुश्मनी न होना, बल्कि धार्मिक नफरत होने की बात दर्ज करते हुए ये कहा हो। जज का किसी समुदाय की भावनाएं आहत करने का इरादा नहीं होगा, लेकिन टिप्पणी आलोचनाओं को बल देती है।
इससे पहले साल 2014 में मोहसिन शेख की पुणे में हिंदू राष्ट्र सेना के सदस्यों द्वारा कथित तौर पर हत्या के मामले 3 आरोपियों की जमानत रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया था।
हत्या के तीन आरोपी विजय राजेंद्र गंभीर, गणेश उर्फ रंजीत शंकर यादव और अजीत दिलीप लागले को अदालत ने जमानत दे दी थी। मोहसिन के परिवार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
